उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा विभाग की केंद्र और राज्यस्तरीय बोर्ड परीक्षाओं में डंका बजाने वाले 1682 मेधावी छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और प्रधानाचार्यों के लिए एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस मंच से जहां एक ओर बच्चों की मेहनत को सराहा गया, वहीं दूसरी ओर सीएम योगी ने बच्चों के सामने जीवन की व्यावहारिक चुनौतियों का एक ऐसा खाका खींचा जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री ने मेधावियों की पीठ थपथपाते हुए उनसे सीधे संवाद किया और रोज़ाना अखबार पढ़ने की आदत डालने की सलाह दी। उन्होंने साफ किया कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहना युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी है।
स्मार्टफोन की जिद पर कड़ा संदेश, डिजिटल लाइब्रेरी को हथियार बनाने की सलाह
आज के दौर में जहां हर बच्चा गैजेट्स का दीवाना है, वहीं सीएम योगी ने मंच से बच्चों को एक बेहद जरूरी और संवेदनशील नसीहत दी। उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता पर स्मार्टफोन खरीदने के लिए किसी भी तरह का बेवजह दबाव न बनाएं। मोबाइल स्क्रीन पर घंटों समय गंवाने के बजाय बच्चों को सोशल मीडिया से दूरी बनानी चाहिए और अपना कीमती समय वहां न्यूनतम (कम से कम) खर्च करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तकनीक के सही इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि अगर डिजिटल माध्यम का उपयोग करना ही है, तो डिजिटल लाइब्रेरी से जुड़ें और अपने तय पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करें।
‘शॉर्टकट’ से सफलता मुमकिन नहीं, अति-आत्मविश्वास को बताया सबसे बड़ा दुश्मन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों को जीवन में कभी न हारने का गुरुमंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि इंसान की असफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह उसका ‘अति-आत्मविश्वास’ (ओवरकॉन्फिडेंस) होता है, जिसके चक्कर में वह छोटी-छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज कर देता है। बच्चों को प्रेरित करते हुए सीएम ने कहा कि ‘शॉर्टकट’ का रास्ता कुछ समय के लिए तो मददगार दिख सकता है, लेकिन अगर जीवन में एक लंबी और लंबी दूरी की कामयाबी तय करनी है, तो सही और ईमानदारी का रास्ता ही अपनाना होगा। उन्होंने प्राचीन सूक्ति ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का जिक्र करते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो हमें हर बंधन से मुक्त करे और समाज व राष्ट्र के सामने आने वाली चुनौतियों से लड़ने की ताकत दे।
56 लाख छात्रों की परीक्षा और 15 दिन में रिज़ल्ट, ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ से बदलेगी स्कूलों की सूरत
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलावों का लेखा-जोखा रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों के भीतर राज्य में पूरी तरह से नकल-विहीन परीक्षाएं आयोजित कराने का ऐतिहासिक कार्य किया गया है। आज स्थिति यह है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में करीब 56 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं, और यह पूरी परीक्षा मात्र 14 से 15 दिनों में पारदर्शी तरीके से संपन्न करा ली जाती है। इतना ही नहीं, अगले दो हफ्तों के भीतर परिणाम भी जारी कर दिए जाते हैं। शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार के प्रयासों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत राज्य के विद्यालयों के जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम धनराशि जारी की जा चुकी है, जिससे सरकारी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक बनेगा।
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