पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया, जब नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई। राज्य सरकार ने खुद इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की थी, जिसके बाद सीबीआई ने 11 मई से आधिकारिक तौर पर केस अपने हाथ में ले लिया। इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर एक बड़े विपक्षी नेता से जुड़ा हुआ है। बीजेपी लगातार इस हत्या को राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि टीएमसी इस मामले में खुद को निर्दोष बता रही है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सीबीआई जांच में आखिर कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी।
दिनदहाड़े चली गोली, अस्पताल पहुंचने से पहले गई जान
यह सनसनीखेज घटना 6 मई को सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ पर अज्ञात हमलावरों ने अचानक गोली चला दी थी। गोली लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें स्थानीय नर्सिंग होम पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया था। बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक हमला करार दिया और सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के कुछ कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। इस टीम में एसटीएफ और सीआईडी के अनुभवी अधिकारियों को भी शामिल किया गया, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचा जा सके। शुरुआती जांच में पुलिस को कई तकनीकी सुराग मिले, जिसने केस को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
यूपीआई पेमेंट बना सबसे बड़ा सुराग, बिहार और यूपी से जुड़े आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसा सुराग मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद भाग रहे आरोपियों में से एक ने टोल प्लाजा पर यूपीआई के जरिए भुगतान किया था। इसी डिजिटल ट्रांजैक्शन से पुलिस को मोबाइल नंबर और लोकेशन जैसी अहम जानकारियां मिलीं। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। एसआईटी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य बिहार के रहने वाले हैं, जबकि राज सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का निवासी बताया गया है। तीनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह हत्या किसी बड़ी साजिश के तहत कराई गई हो सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को किसने भेजा था और क्या हत्या के पीछे राजनीतिक या आर्थिक वजह थी। डिजिटल पेमेंट के जरिए आरोपियों तक पहुंचना इस केस की सबसे बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
अब CBI के सामने कई बड़े सवाल, राजनीतिक घमासान और तेज
सीबीआई के हाथ में जांच जाने के बाद अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। बीजेपी का कहना है कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं था, इसलिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी थी। वहीं टीएमसी का दावा है कि राज्य सरकार ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खुद सीबीआई जांच की सिफारिश की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकता है। सीबीआई अब हत्या के पूरे नेटवर्क, फंडिंग, आरोपियों के संपर्क और संभावित मास्टरमाइंड की तलाश करेगी। एजेंसी यह भी जांच करेगी कि क्या हत्या पहले से प्लान की गई थी या फिर किसी व्यक्तिगत विवाद का नतीजा थी। फिलहाल चंद्रनाथ रथ के परिवार और बीजेपी समर्थकों को उम्मीद है कि सीबीआई जांच से उन्हें न्याय मिलेगा और हत्या के पीछे छिपे असली चेहरों का खुलासा होगा। पूरे राज्य की नजर अब इस हाई प्रोफाइल जांच पर टिकी हुई है।
Read more-विजय के CM बनते ही तृषा ने शेयर की खास तस्वीरें, कैप्शन पढ़ फैंस बोले- ‘ये इशारा है!’







