फॉर्च्युनर की मांग ने ली जान, HC ने दे दी जमानत, अब सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ सख्त?

दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी को जमानत दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि इतने गंभीर मामले में जमानत देते समय तथ्यों और परिस्थितियों को नजरअंदाज करना न्यायिक विवेक की बड़ी चूक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि केवल एफआईआर दर्ज होने में देरी को आधार बनाकर आरोपी को राहत देना उचित नहीं ठहराया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में दहेज से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

दहेज प्रथा पर कोर्ट की चिंता और आंकड़े

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दहेज से जुड़े अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कानून सख्त होने और शिक्षा के प्रसार के बावजूद दहेज की कुप्रथा खत्म नहीं हो रही है, बल्कि कई मामलों में यह और खतरनाक रूप ले रही है। अदालत के अनुसार, दहेज की मांग अक्सर महिलाओं के साथ क्रूरता, हिंसा और अंततः हत्या या आत्महत्या तक पहुंच जाती है। उपलब्ध आंकड़ों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने बताया कि हाल के वर्षों में हजारों मामले सामने आए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ऐसे अपराधों की संख्या काफी अधिक है। कोर्ट ने इसे समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बताया।

फॉर्च्युनर की मांग बनी मौत की वजह

यह मामला साल 2024 का है, जब गाजियाबाद में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। महिला के परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। शादी में भारी खर्च और कार देने के बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुईं। आरोप है कि कार के क्षतिग्रस्त होने के बाद पति और उसके परिवार ने फॉर्च्युनर कार और अतिरिक्त नकद राशि की मांग शुरू कर दी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। घटना वाले दिन महिला ने अपने पिता को फोन कर मारपीट और जान से मारने की धमकी की जानकारी दी थी। कुछ घंटों बाद उसकी मौत की खबर आई, जिससे परिवार में शोक और आक्रोश फैल गया।

जांच, जमानत और आगे की कानूनी राह

घटना के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पति समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। जांच के बाद पुलिस ने पति और उसके माता-पिता के खिलाफ गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, हाईकोर्ट ने आरोपी पति को जमानत दे दी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और गंभीरता से निर्णय लेना जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और समाज में गलत संदेश न जाए। इस मामले ने एक बार फिर दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जागरूकता की जरूरत को उजागर कर दिया है।

Read More-“कौन बनेगा बंगाल का नया CM?” 9 मई को शपथ, उससे पहले 8 मई की बैठक में होगा बड़ा फैसला

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img