यूपी में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना कराने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार इस बार लोगों की सिर्फ गिनती नहीं करेगी, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक हालात का पूरा रिकॉर्ड तैयार करेगी। इसके लिए हर जिले में प्रशासनिक स्तर पर काम तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित और डिजिटल तरीके से होगी ताकि किसी भी तरह की गलती की संभावना कम रहे।
दो चरणों में होगा बड़ा सर्वे, घर-घर पहुंचेंगे कर्मचारी
यह जनगणना दो हिस्सों में की जाएगी। पहले चरण में हर घर की सूची और बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में लोगों की जाति और सामाजिक स्थिति से जुड़ा डेटा दर्ज किया जाएगा। अनुमान है कि यह प्रक्रिया 2026 से शुरू होकर 2027 तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद पूरे राज्य का विस्तृत डेटा सार्वजनिक किया जाएगा, जो नीति बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
लाखों कर्मचारियों की टीम और डिजिटल सिस्टम से होगी एंट्री
इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए लाखों कर्मचारियों की टीम लगाई जाएगी, जो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेगी। खास बात यह है कि इस बार पूरा डेटा मोबाइल ऐप और डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। इससे जानकारी तुरंत अपडेट होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी। सरकार का दावा है कि यह अब तक की सबसे आधुनिक जनगणना होगी।
नीतियों और आरक्षण पर पड़ सकता है बड़ा असर
जातिगत जनगणना से मिलने वाला डेटा आने वाले समय में सरकार की नीतियों को बदल सकता है। इससे यह साफ हो सकेगा कि कौन सा वर्ग किन सुविधाओं से पीछे है। इसी आधार पर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक योजनाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम आने वाले वर्षों में राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा असर डालेगा।
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