केंद्र सरकार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। Atal Pension Yojana के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन की अधिकतम सीमा को बढ़ाने पर गंभीर विचार चल रहा है। फिलहाल इस योजना में 60 साल की उम्र के बाद ₹1000 से ₹5000 तक की गारंटीड पेंशन मिलती है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, जिनके पास नियमित आय या रिटायरमेंट के बाद कोई स्थायी आर्थिक सहारा नहीं होता। सरकार का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना और भविष्य में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।
असंगठित क्षेत्र के लिए क्यों जरूरी है बदलाव
भारत की कुल कार्यबल का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबारी शामिल हैं। इन लोगों के पास न तो पक्की नौकरी होती है और न ही भविष्य के लिए कोई सुरक्षित पेंशन व्यवस्था। ऐसे में अटल पेंशन योजना उनके लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए मौजूदा ₹5000 की सीमा अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पेंशन राशि बढ़ाई जाती है, तो इससे बुजुर्ग अवस्था में इन वर्गों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी और वे सम्मानजनक जीवन जी पाएंगे।
क्या है सरकार का नया प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, इस योजना में बदलाव को लेकर Pension Fund Regulatory and Development Authority और वित्त मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। प्रस्ताव के तहत अधिकतम पेंशन को दोगुना कर ₹10,000 प्रति माह तक करने की योजना है। साथ ही योजना के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। सरकार इसे गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए पेंशन सखी और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट जैसे माध्यमों का उपयोग कर रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना से अब तक करीब 9 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं, हालांकि इनमें से कई लोगों ने बीच में योगदान देना बंद भी कर दिया है। फिर भी नए जुड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।
सरकार पर कितना पड़ेगा असर और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन राशि बढ़ाने से सरकार पर बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लोगों के अपने योगदान पर आधारित है। सरकार केवल नियामक और प्रोत्साहन की भूमिका निभाती है। इसके अलावा, इस योजना को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार लंबे समय तक इस योजना को मजबूत बनाए रखना चाहती है। अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो यह न सिर्फ सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाएगा, बल्कि देश के करोड़ों लोगों को भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार भी प्रदान करेगा।
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