हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ जारी जंग जैसे हालातों के बीच अमेरिका की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अमेरिकी नेवी नेतृत्व में बड़ा फेरबदल कर दिया है। इसी क्रम में नेवी सेक्रेटरी जॉन सी. फेलन को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है।
पेंटागन की ओर से बुधवार (23 अप्रैल, 2026) को इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई, जिसमें कहा गया कि फेलन अब प्रशासन का हिस्सा नहीं हैं। बयान में उनके कार्यकाल और सेवाओं के लिए धन्यवाद भी दिया गया, लेकिन हटाने के पीछे के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पहले ही आर्मी नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया जा चुका था और रक्षा मंत्रालय के भीतर अस्थिरता की चर्चा तेज हो गई थी।
रक्षा सचिव से टकराव और अंदरूनी विवाद की कहानी
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जॉन फेलन और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। यह विवाद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक फैसलों और कार्यशैली को लेकर भी गहराता जा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, फेलन और पेंटागन नेतृत्व के बीच सबसे बड़ा विवाद नेवी के जहाज निर्माण कार्यक्रम और “गोल्डन फ्लीट” प्रोजेक्ट को लेकर था। यह प्रोजेक्ट नए युद्धपोतों और एक बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण से जुड़ा था, जिसे ट्रंप की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि, रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी इस योजना के खर्च, प्रबंधन और कार्यान्वयन को लेकर असंतुष्ट थे। धीरे-धीरे यह मतभेद इतना बढ़ गया कि फेलन के अधिकारों को सीमित किया जाने लगा और अंततः उन्हें पद से हटाने का फैसला लिया गया।
डिप्टी से भी टकराव
फेलन के लिए मुश्किलें सिर्फ ऊपर तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि उनके अपने डिप्टी अंडर सेक्रेटरी हंग काओ के साथ भी संबंध बेहद तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। हंग काओ को रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का करीबी माना जाता है और उनके फैसलों पर उनका प्रभाव भी माना जाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच नीतियों, सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर लगातार मतभेद बने हुए थे। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि फेलन के कई अधिकार धीरे-धीरे उनके डिप्टी के पास स्थानांतरित कर दिए गए।
इसी बीच पहले ही फेलन के चीफ ऑफ स्टाफ जॉन हैरिसन को भी हटाया जा चुका था, जिससे साफ संकेत मिल रहे थे कि नेवी नेतृत्व में बड़ी अंदरूनी खींचतान चल रही थी और प्रशासनिक ढांचा टूटने की कगार पर पहुंच गया था।
आर्मी चीफ की बर्खास्तगी
यह पूरा घटनाक्रम और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इससे करीब 20 दिन पहले ही अमेरिकी आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को भी पद से हटा दिया गया था। उनका कार्यकाल चार साल का था, लेकिन तीन साल में ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
लगातार हो रहे इन उच्च स्तरीय सैन्य बदलावों ने अमेरिकी प्रशासन और रक्षा नीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि रणनीतिक पुनर्गठन भी हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब हॉर्मुज क्षेत्र में तनाव चरम पर बताया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये बदलाव अमेरिका की नई सैन्य रणनीति का हिस्सा हैं या फिर अंदरूनी सत्ता संघर्ष का परिणाम। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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