संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और जाति जनगणना जैसे मुद्दों पर चर्चा के दौरान माहौल अचानक गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही है। उन्होंने कहा कि अगर देश में सही प्रतिनिधित्व देना है, तो समाज के हर वर्ग की वास्तविक संख्या और स्थिति सामने आनी चाहिए। राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि सिर्फ कानून बना देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे लागू करने की नीयत भी साफ होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
निशिकांत दुबे का तंज, सदन में मची हलचल
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के भाषण पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वह कोई गंभीर चर्चा नहीं, बल्कि “माइकल जैक्शन का डांस” देख रहे हों। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महिलाओं और उनके अधिकारों पर ठोस बात होगी, लेकिन भाषण में उन्हें वैसी गंभीरता नजर नहीं आई। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबा भी हुआ। विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जबकि सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य इस पर मुस्कुराते नजर आए। यह बयान जल्द ही सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
अखिलेश यादव के साथ तीखी नोकझोंक
निशिकांत दुबे के भाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने उन्हें बीच में टोका। उन्होंने कहा कि पुराने विवादों को बार-बार उठाने के बजाय मौजूदा मुद्दों पर बात होनी चाहिए। इस पर दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बहस चली। माहौल उस समय और ज्यादा गंभीर हो गया जब चर्चा के दौरान धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का जिक्र भी सामने आया। हालांकि, बाद में स्थिति संभाली गई और बहस को आगे बढ़ाया गया। इस पूरी घटना ने यह दिखा दिया कि संसद में इस समय मुद्दों को लेकर मतभेद काफी गहरे हैं।
जाति जनगणना पर आरोप-प्रत्यारोप जारी
अपने बयान में निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह पहले जाति जनगणना के खिलाफ रही है। उन्होंने पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग राय रखी थी। वहीं विपक्ष का कहना है कि मौजूदा सरकार इस विषय पर स्पष्टता नहीं दिखा रही है। कुल मिलाकर, यह बहस सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि जाति जनगणना और राजनीतिक इतिहास तक पहुंच गई। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष इस पर अपने-अपने तर्क मजबूत तरीके से रख रहे हैं।
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