अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार के लिए रोजमर्रा का खाना अचानक जानलेवा साबित हुआ। जानकारी के मुताबिक, परिवार ने घर में डोसा बनाने के लिए पास की एक डेयरी से तैयार बैटर खरीदा था। लगातार दो दिनों तक उसी बैटर से डोसा बनाकर खाया गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे परिवार के चारों सदस्यों—पिता, मां और उनकी दो मासूम बेटियों—की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टियां, कमजोरी और बेचैनी जैसे लक्षण सामने आए, जिन्हें पहले मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया गया।
पहले राहत, फिर अचानक बिगड़ी हालत और दो मासूमों की मौत
परिवार को कुछ समय के लिए राहत भी मिली, जिससे उन्हें लगा कि हालत संभल रही है। लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई। अचानक तीन महीने की मासूम बच्ची राहा की घर पर ही मौत हो गई। दुख और अनजाने में परिवार ने बिना पुलिस को सूचना दिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद तीन साल की बड़ी बेटी मिष्टी की हालत भी तेजी से बिगड़ी और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। माता-पिता की हालत भी बेहद गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
डेयरी पर उठे सवाल, मालिक ने दी सफाई
इस दर्दनाक घटना के बाद जिस डेयरी से बैटर खरीदा गया था, वह जांच के दायरे में आ गई है। डेयरी मालिक ने अपने बचाव में कहा है कि उसी दिन उसी बैच का बैटर करीब 20 अन्य ग्राहकों ने भी खरीदा था, लेकिन किसी और से कोई शिकायत नहीं आई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी दुकान पर साफ-सफाई के पूरे मानक अपनाए जाते हैं। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज भी सौंप दिए गए हैं ताकि यह साफ हो सके कि बैटर कब और कैसे तैयार किया गया था। इसके बावजूद, लोगों के मन में सवाल बना हुआ है कि आखिर उसी बैटर ने इस परिवार को ही क्यों निशाना बनाया।
जांच जारी, फूड पॉइजनिंग या कुछ और?
फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है। घर और डेयरी दोनों जगहों से सैंपल लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। शुरुआती आशंका फूड पॉइजनिंग या बैटर में किसी तरह की मिलावट की है, लेकिन अधिकारी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। एक अहम पहलू यह भी है कि इतनी छोटी बच्ची कैसे प्रभावित हुई, जबकि वह ठोस आहार नहीं लेती थी। जांच में यह संभावना भी जताई जा रही है कि मां के जरिए स्तनपान से संक्रमण या जहर बच्ची तक पहुंचा हो सकता है। अब सभी की नजर लैब रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे मामले का सच सामने ला सकती है।
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