गैस संकट का असर मंदिरों तक! कहीं भोग कम हुआ, कहीं प्रसाद घटा… जानिए किन बड़े मंदिरों में बदली व्यवस्था

हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित होने लगी है, जिसका असर अब आम लोगों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई देने लगा है। बताया जा रहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष, खासकर Iran और Israel से जुड़ी परिस्थितियों के चलते गैस सप्लाई की स्थिति पर दबाव बढ़ा है। इसका असर भारत के कई शहरों में देखने को मिल रहा है। पहले होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट प्रभावित हुए थे, लेकिन अब मंदिरों की रसोई भी इस संकट से अछूती नहीं रही। देश के कुछ बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों में गैस सिलेंडर की कमी के कारण भोजन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था है और गैस की स्थिति सामान्य होने के बाद सब कुछ पहले जैसा कर दिया जाएगा।

अयोध्या राम मंदिर की राम रसोई में बदली व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के Ayodhya में स्थित Ram Mandir Ayodhya में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जाता है। मंदिर परिसर में चलने वाली ‘राम रसोई’ में प्रतिदिन करीब 10 हजार लोगों के लिए भोजन बनाया जाता है। लेकिन गैस सिलेंडर की कमी के कारण यहां खाना बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल रसोई में गैस के बजाय लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है। इन पारंपरिक चूल्हों पर भोजन बनाने में अधिक समय लगता है, इसलिए फिलहाल तीन समय की जगह दो समय ही भोजन परोसा जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील भी की है और कहा है कि गैस आपूर्ति सामान्य होने तक यह व्यवस्था जारी रह सकती है।

इस्कॉन मंदिर और शिरडी में भी दिखा असर

गैस की कमी का असर ISKCON Temple Noida में भी देखने को मिला है। यहां भगवान के लिए बनने वाला भोग अब देसी चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है क्योंकि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में रुकावट आई है। पहले मंदिर में भक्तों के लिए कई तरह के पकवान बनाए जाते थे, लेकिन फिलहाल सीमित संसाधनों के कारण सिर्फ साधारण भोजन जैसे कड़ी-चावल ही तैयार किया जा रहा है। इसी तरह Shirdi Sai Baba Temple में भी गैस की बचत के लिए प्रसाद वितरण में बदलाव किया गया है। मंदिर ट्रस्ट ने फैसला लिया है कि फिलहाल भक्तों को एक ही लड्डू का प्रसाद पैकेट दिया जाएगा। हालांकि यहां सौर ऊर्जा से चलने वाली व्यवस्था होने के कारण भोग बनाने में थोड़ी राहत मिल रही है।

दीघा के जगन्नाथ मंदिर में भक्तों की संख्या सीमित

पश्चिम बंगाल के Digha में स्थित Jagannath Temple Digha में भी गैस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। मंदिर में पहले हर दिन करीब 3000 श्रद्धालुओं के लिए भोग तैयार किया जाता था, लेकिन अब गैस की कमी के कारण इसे घटाकर लगभग 700 लोगों तक सीमित कर दिया गया है। मंदिर ट्रस्टी बोर्ड का कहना है कि गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य होने तक यह व्यवस्था जारी रखनी पड़ेगी। धार्मिक संस्थानों का कहना है कि वे किसी भी तरह श्रद्धालुओं को असुविधा नहीं देना चाहते, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण उन्हें कुछ कठिन फैसले लेने पड़ रहे हैं। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो देश में ऊर्जा और गैस सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर और असर देखने को मिल सकता है।

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