पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत की जानकारी खुद जयशंकर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में जारी हालात और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखना जरूरी है और इसी कारण यह बातचीत की गई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष लगातार संपर्क में रहेंगे ताकि हालात पर नजर रखी जा सके।
ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष चर्चा
इस बातचीत का सबसे अहम मुद्दा ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा रहा। जानकारी के अनुसार ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और पेशेवर लोग रहते हैं, इसलिए भारत सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है। विदेश मंत्रालय पहले ही एडवाइजरी जारी कर चुका है जिसमें भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कुछ छात्रों के लिए वैकल्पिक रास्तों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की जानकारी भी साझा की गई थी। उदाहरण के तौर पर आर्मीनिया सीमा के रास्ते भारत लौटने का विकल्प बताया गया था, हालांकि भारतीय दूतावास ने यह स्पष्ट किया कि यह यात्रा छात्रों को अपने जोखिम पर करनी होगी। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी भारतीय नागरिक को संकट का सामना न करना पड़े।
अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी संपर्क
मौजूदा संकट को देखते हुए भारत केवल ईरान के साथ ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख देशों के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul से भी फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई। इसके अलावा जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री Cho Hyun से भी बात की। इस बातचीत में खास तौर पर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले असर और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बातचीत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और समन्वय बढ़ाने में मदद मिलती है।
वैश्विक स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani से भी पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने जैसे मुद्दों पर विचार किया। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक बाजारों पर भी पड़ता है। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीतिक पहल न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन बनाए रखने के प्रयासों का भी हिस्सा है।








