Wednesday, January 7, 2026

कॉमनवेल्थ विवाद से सत्ता के शिखर तक… 82 साल में थम गई सुरेश कलमाड़ी की कहानी, पुणे में हुआ निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। महाराष्ट्र के पुणे में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका जाना न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि देश की राजनीति और खेल प्रशासन से जुड़े एक पूरे दौर के अंत की तरह देखा जा रहा है। लंबे समय से बीमार चल रहे सुरेश कलमाड़ी ने मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे दुनिया को अलविदा कहा। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।

लंबी बीमारी के बाद पुणे में निधन, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार, 6 जनवरी की सुबह पुणे में निधन हो गया। वे काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सक्रिय सार्वजनिक जीवन से दूर थे। उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने तड़के करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर पुणे के एरंडवणे इलाके में स्थित कलमाड़ी हाउस में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं, राजनीतिक नेताओं और शुभचिंतकों का तांता लगा रहा।

परिवार ने बताया कि दोपहर 2 बजे तक पार्थिव शरीर को घर पर रखा गया और इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। शाम 3:30 बजे पुणे के नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशानभूमि में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ कई सामाजिक और खेल जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि सुरेश कलमाड़ी का प्रभाव राजनीति तक सीमित नहीं था।

राजनीति और सत्ता का लंबा सफर, पुणे से संसद तक बनाई पहचान

सुरेश कलमाड़ी का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। उनका जन्म 1 मई 1944 को हुआ था। शुरुआती जीवन में वे भारतीय वायु सेना के पायलट रहे, लेकिन बाद में उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना। अनुशासन और संगठन क्षमता के कारण वे जल्द ही कांग्रेस पार्टी में एक मजबूत चेहरा बनकर उभरे।

साल 1982 में वे राज्यसभा के सदस्य बने और इसके बाद पुणे लोकसभा सीट से कई बार सांसद चुने गए। 1995 में उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया। पुणे की राजनीति में उनका दबदबा लंबे समय तक बना रहा। स्थानीय विकास से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति तक, सुरेश कलमाड़ी को एक प्रभावशाली नेता के तौर पर जाना जाता था। हालांकि बीते कुछ वर्षों से वे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थे।

कॉमनवेल्थ गेम्स विवाद, जिसने बदल दी सियासी छवि

सुरेश कलमाड़ी का नाम देशभर में सबसे ज्यादा 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़कर सामने आया। दिल्ली में हुए इन खेलों के आयोजन के दौरान उन पर ठेकों के आवंटन, प्रबंधन और खर्च में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे। भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों के चलते उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

इस विवाद ने उनकी राजनीतिक छवि को गहरा झटका दिया। जिस नेता को कभी संगठन और प्रशासन का मजबूत स्तंभ माना जाता था, वही नेता विवादों के केंद्र में आ गया। हालांकि, उन्होंने हमेशा खुद को निर्दोष बताया और कानूनी लड़ाई लड़ी। कॉमनवेल्थ गेम्स विवाद भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन के इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जाता है, और सुरेश कलमाड़ी का नाम हमेशा इससे जुड़ा रहेगा।

खेल प्रशासन, निजी जीवन और विरासत

राजनीति के अलावा सुरेश कलमाड़ी खेल प्रशासन में भी काफी सक्रिय रहे। वे लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष रहे और देश में खेलों के विकास से जुड़े कई बड़े फैसलों में उनकी भूमिका रही। खेल जगत में उनके समर्थक उन्हें एक कुशल प्रशासक मानते थे, जबकि आलोचक उनके कार्यकाल को विवादों से जोड़कर देखते थे।

निजी जीवन की बात करें तो सुरेश कलमाड़ी का विवाह मीरा कलमाड़ी से हुआ था। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। वे एक ऐसे नेता रहे, जिनका जीवन उपलब्धियों, सत्ता, विवादों और संघर्षों से भरा रहा। उनका निधन एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसे भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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