त्रिशूल-डमरू के साथ दिखे पीएम मोदी! काशी में पूजा के बाद सामने आईं तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने बुधवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रों के बीच उन्होंने बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया और देशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के दौरान प्रधानमंत्री पूरी तरह आध्यात्मिक भाव में नजर आए। माथे पर त्रिपुंड लगाए और पारंपरिक अंदाज में पूजा करते हुए उनकी तस्वीरें सामने आईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

त्रिशूल और डमरू के साथ दिखा अलग अंदाज

पूजा-अर्चना के बाद जब प्रधानमंत्री मंदिर परिसर से बाहर आए, तो वहां मौजूद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें त्रिशूल और डमरू भेंट किया। पीएम मोदी ने इन प्रतीकों को हाथ में लेकर हवा में लहराया, जो उनकी आस्था और परंपरा से जुड़ाव को दर्शाता है। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गया। बाद में प्रधानमंत्री ने इन तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए लिखा कि उन्हें काशी में दर्शन और पूजन का सौभाग्य मिला और उन्होंने भगवान से देश के हर नागरिक के स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की।

चुनावी माहौल के बीच काशी दौरा

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए मतदान चल रहा है। चुनावी हलचल के बीच उनका काशी पहुंचना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की शुरुआत करना भी था। इससे पहले उन्होंने वाराणसी में कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विकास परियोजनाओं के साथ संदेश भी

अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वाराणसी को हजारों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा उन्होंने काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को और मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी जोर दिया। काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान की उनकी तस्वीरें अब सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश के रूप में भी देखी जा रही हैं, जिसमें विकास और परंपरा दोनों को साथ लेकर चलने की झलक मिलती है।

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