बिहार में सोमवार को पांच राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। एनडीए के सभी पांच उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि चार विधायक मतदान से दूर रहे। इस घटना ने महागठबंधन में हलचल मचा दी है। आरजेडी नेता शक्ति सिंह यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हमारे पक्ष में 41 की संख्या थी और सत्ता पक्ष में तीन की कमी थी, इसलिए सत्ता और धन दोनों का इस्तेमाल स्वाभाविक है।” उनका कहना था कि राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग का जो खेल चल रहा है, वह सही नहीं है और इससे लोकतंत्र की भावना प्रभावित हो रही है।
शक्ति यादव का बयान और ओडिशा की तुलना
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह घटना सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ओडिशा में बीजु जनता दल के 9 से 12 एमएलए भी अपने दल से अलग हो गए और भाजपा के पक्ष में चले गए। शक्ति यादव ने कहा, “ये कौन सी पहलवानी है? देश की राजनीति को कलंकित किया जा रहा है। जब संख्या कम हो और मनमानी बढ़ती हो, तो इसका जवाब कौन देगा?” उन्होंने साफ किया कि यह घटनाक्रम राजनीतिक प्रतिबद्धता खोने का संकेत है और जो लोग ऐसे कृत्यों में शामिल होते हैं, उनका राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल नहीं रहता।
चार महागठबंधन विधायक नहीं पहुंचे मतदान
शक्ति यादव ने कहा कि चार विधायकों (तीन कांग्रेस और एक RJD) की गैरहाजिरी से महागठबंधन की हार हुई। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह खरीद-फरोख्त का मामला है, तो शक्ति यादव ने जवाब दिया कि “हम इतना ही जानते हैं कि उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता खोई है। समाज में उनकी पहचान पर असर पड़ेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास राजनीतिक चेतना होती, तो यह चुनाव संकट ही उत्पन्न नहीं होता और सभी सीटों पर निर्विरोध परिणाम निकल सकते थे। उनका मानना है कि सत्ता और धन का प्रभाव लोकतंत्र की भावना के खिलाफ काम कर रहा है।
राजनीति की नैतिकता और आगामी चुनावों पर असर
शक्ति यादव ने जोर देकर कहा कि यह घटनाक्रम बिहार और पूरे देश के लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा की जा रही हॉर्स ट्रेडिंग और मनमानी देश की राजनीति को कलंकित कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतों को बढ़ावा देने वाले दल और नेता भविष्य में जनता के विश्वास खो देंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि जनता को अब सजग होने की जरूरत है ताकि लोकतंत्र की सच्चाई और नैतिकता कायम रहे।








