एक ही तारीख, दो संन्यास: जब धोनी के फैसले के चंद मिनट बाद रैना ने भी कह दिया अलविदा, जानिए क्या था कैप्टन कूल का रिएक्शन

साल 2020 की 15 अगस्त की तारीख भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक पलों में से एक है। इस ऐतिहासिक दिन शाम के वक्त एमएस धोनी ने जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया, तो पूरे देश के क्रिकेट प्रेमियों की आंखें नम हो गईं। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि माही अचानक इस तरह संन्यास का ऐलान कर देंगे। हालांकि, इस झटके से फैंस अभी उबरे भी नहीं थे कि कुछ ही घंटों के भीतर उनके जिगरी यार और चेन्नई सुपर किंग्स के भरोसेमंद बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर सबको हैरान कर दिया। धोनी और रैना की पक्की दोस्ती के किस्से जगजाहिर हैं, ऐसे में दोनों का एक ही दिन संन्यास लेना किसी इत्तेफाक से कम नहीं था।

धोनी का हैरान करने वाला रिएक्शन

पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा के साथ एक इंटरव्यू में बातचीत के दौरान सुरेश रैना ने उस राज से पर्दा उठाया है कि जब उन्होंने अपना संन्यास लिया था, तब एमएस धोनी की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी। रैना ने खुलकर बताया कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि यही सही वक्त है क्योंकि परिवार को समय देना जरूरी था और उम्र भी उस पड़ाव पर थी। रैना ने साझा किया कि जब वह धोनी के संन्यास के ऐलान के बाद ड्रेसिंग रूम में उनसे मिले और कहा कि “अब सब खत्म,” तो धोनी पूरी तरह से चौंक गए थे। माही ने तुरंत हैरानी जताते हुए रैना से कहा, “ये क्या किया तूने?” दोनों दिग्गजों के बीच का यह पल काफी भावुक और हैरान करने वाला था।

माहिती के लिए अपनी बैटिंग पोजीशन छोड़ी

अपनी सफलता और करियर को लेकर बात करते हुए सुरेश रैना ने एमएस धोनी के प्रति दिल से आभार जताया और माना कि धोनी ने उनके लिए कई बड़े त्याग किए। रैना ने स्वीकार किया कि वह अक्सर अपने कप्तान और टीम के लिए खेलते थे क्योंकि धोनी ने खुद अपनी बैटिंग पोजीशन को ताक पर रखकर रैना को सेट होने का मौका दिया था। सौरव गांगुली की कप्तानी के शुरुआती दिनों में धोनी खुद ऊपर के क्रम में बैटिंग करने आते थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को निचले क्रम (नंबर 6) पर धकेल दिया और युवराज सिंह व सुरेश रैना जैसे खिलाड़ियों को ऊपर बल्लेबाजी करने का पूरा अवसर दिया।

कप्तान के इस प्यार ने बढ़ाया था हौसला

रैना का मानना है कि कप्तान धोनी के इस निःस्वार्थ रवैया और भरोसे ने उन्हें मैदान पर देश के लिए और अधिक खून-पसीना बहाने की प्रेरणा दी। जब एक कप्तान खुद अपनी जगह छोड़कर अपने खिलाड़ी को आगे बढ़ने का मौका देता है, तो टीम के भीतर एक अलग ही ऊर्जा और विश्वास पैदा होता है। धोनी और रैना की यह जोड़ी मैदान पर जितनी सफल रही, उतनी ही गहरी उनकी मैदान के बाहर की बॉन्डिंग भी रही है। भले ही दोनों खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन आज भी जब वे आईपीएल या किसी अन्य मंच पर साथ नजर आते हैं, तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं और फैंस का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच जाता है।

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