परिसीमन से FCRA तक… 48 घंटे में विजय सरकार के दो बड़े वार, DMK ने बढ़ाया हाथ

तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार से जुड़े परिसीमन और FCRA के मुद्दों पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराए। खास बात यह रही कि परिसीमन के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को डीएमके ने भी समर्थन दिया। इससे राज्य की राजनीति में विजय सरकार और डीएमके के बीच इस मुद्दे पर एक जैसी राय सामने आई है।

परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में पास हुआ प्रस्ताव

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। करीब दो घंटे तक इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। प्रस्ताव में मांग की गई कि लोकसभा में मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखा जाए। सरकार का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण को गंभीरता से लागू किया है, उन्हें परिसीमन के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने में परिसीमन के नाम पर देरी नहीं होनी चाहिए।

DMK ने दिया समर्थन, विजय सरकार ने कहा- थैंक्यू

परिसीमन प्रस्ताव पर डीएमके ने विजय सरकार का समर्थन किया। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी का रुख है कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के आरक्षण का भी समर्थन किया। इसके बाद तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने डीएमके को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस मुद्दे पर साथ आने के लिए पार्टी का आभार है।

FCRA पर भी केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव

इससे एक दिन पहले तमिलनाडु विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलावों से सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। इस प्रस्ताव को भी डीएमके का समर्थन मिला। वहीं FCRA बिल को लेकर केंद्र सरकार ने इसे जांच के लिए JPC के पास भेज दिया है।

NEET पर भी तमिलनाडु सरकार का अलग रुख

तमिलनाडु विधानसभा इससे पहले NEET के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इसमें केंद्र से मेडिकल दाखिले के लिए NEET खत्म करने और 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की मांग की गई है। डीएमके, AIADMK, PMK और वाम दलों के सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि बीजेपी विधायक ने विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। ऐसे में परिसीमन, FCRA और NEET जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु सरकार का रुख केंद्र से अलग नजर आ रहा है।

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