अब ChatGPT सिर्फ जवाब नहीं, वीडियो भी बनाएगा! जानें कब तक होगा इंतजार खत्म

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इसी कड़ी में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। अब तक लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब पाने, लेख लिखने या इमेज बनाने के लिए करते थे, लेकिन आने वाले समय में यह प्लेटफॉर्म वीडियो भी बना सकेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, OpenAI अपने एडवांस वीडियो जनरेशन मॉडल ‘Sora’ को ChatGPT के साथ जोड़ने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो यूजर्स केवल टेक्स्ट लिखकर कुछ ही सेकंड में वीडियो तैयार कर सकेंगे। इस बदलाव को एआई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे कंटेंट क्रिएशन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

टेक्स्ट प्रॉम्प्ट से तैयार होंगे वीडियो

बताया जा रहा है कि Sora मॉडल की खासियत यह है कि यह साधारण टेक्स्ट निर्देश के आधार पर पूरा वीडियो तैयार कर सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर लिखे कि “समुद्र किनारे सूर्योदय का दृश्य दिखाओ”, तो यह मॉडल उसी विषय पर एक वीडियो तैयार कर सकता है। इसके अलावा यह टूल पहले से मौजूद वीडियो या कंटेंट को एडिट और रिमिक्स भी कर सकता है। इस तकनीक का उपयोग फिल्म निर्माण, सोशल मीडिया कंटेंट, शिक्षा और मार्केटिंग जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। फिलहाल Sora को अलग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया गया है, लेकिन इसे सीधे ChatGPT में जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर सकें।

यूजर्स को मिलेंगे नए क्रिएटिव फीचर्स

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि ChatGPT में वीडियो जनरेशन फीचर आने से क्रिएटर्स को कई नए विकल्प मिलेंगे। इस तकनीक के जरिए यूजर्स अपनी कल्पना के अनुसार सीन बना सकते हैं और उन्हें वीडियो के रूप में देख सकते हैं। इसमें ‘Cameos’ नाम का एक खास फीचर भी बताया जा रहा है, जिसमें यूजर खुद को किसी एआई-जनरेटेड वीडियो सीन में जोड़ सकते हैं। यानी भविष्य में लोग अपनी फोटो या इमेज को किसी भी कल्पनात्मक वीडियो में शामिल कर पाएंगे। इस तरह का फीचर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि इस अपडेट के बाद ChatGPT एक साधारण चैटबॉट से आगे बढ़कर एक पूरा क्रिएटिव प्लेटफॉर्म बन सकता है।

बढ़ सकती है डीपफेक वीडियो की चुनौती

हालांकि इस नई तकनीक के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के जरिए वीडियो बनाना आसान होने से डीपफेक वीडियो की समस्या भी बढ़ सकती है। डीपफेक वह तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति की नकली वीडियो बनाकर उसे असली जैसा दिखाया जाता है। पिछले कुछ समय में इंटरनेट पर ऐसे वीडियो तेजी से बढ़े हैं, जिससे असली और नकली कंटेंट में फर्क करना मुश्किल हो गया है। इसी कारण टेक कंपनियां अब एआई के जिम्मेदार उपयोग को लेकर भी नियम और सुरक्षा उपाय तैयार कर रही हैं। इसके बावजूद यह साफ है कि आने वाले समय में एआई वीडियो टेक्नोलॉजी कंटेंट क्रिएशन, फिल्म इंडस्ट्री और डिजिटल मीडिया के लिए नई संभावनाएं खोलने वाली है।

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