Patna JDU Office Clash: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने को लेकर लिए गए फैसले के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। रविवार को पटना स्थित जेडीयू कार्यालय में इस नाराजगी का खुला रूप सामने आया, जब पार्टी के कुछ कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की खबर के बाद से ही कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ गया था और रविवार को यह नाराजगी झगड़े में बदल गई।
घटना उस समय हुई जब कुछ कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय में इकट्ठा होकर अपनी नाराजगी जता रहे थे। इसी दौरान एक कार्यकर्ता ने जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Singh के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। नारे सुनकर वहां मौजूद दूसरे कार्यकर्ता भड़क गए और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार्यकर्ता एक-दूसरे को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं।
ललन सिंह के खिलाफ नारेबाजी से बढ़ा विवाद
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार झगड़े की शुरुआत उस समय हुई जब एक कार्यकर्ता ने ललन सिंह के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। वह लगातार “ललन सिंह मुर्दाबाद” के नारे लगा रहा था। इससे नाराज होकर ललन सिंह के समर्थक कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।
इस घटना के दौरान पार्टी कार्यालय में पुलिसकर्मी और कुछ वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे, लेकिन अचानक हुए विवाद के कारण कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में पुलिस और अन्य कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। हालांकि इस घटना ने साफ कर दिया कि पार्टी के अंदर इस फैसले को लेकर मतभेद मौजूद हैं और कई कार्यकर्ता अभी भी नाराज हैं।
पहले भी हो चुका है विरोध और तोड़फोड़
यह पहली बार नहीं है जब जेडीयू कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई हो। इससे पहले भी पटना में पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन और हंगामे की घटनाएं हो चुकी हैं। गुरुवार को भी कई कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुंचे थे और उन्होंने मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के फैसले का विरोध किया था। उस समय भी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की थी और कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की खबरें सामने आई थीं।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता भावुक भी नजर आए। वे नारे लगाते हुए कह रहे थे कि “नीतीश कुमार बिहार की पहचान हैं और उन्हें राज्य की राजनीति छोड़कर नहीं जाना चाहिए।” कुछ कार्यकर्ताओं ने यहां तक कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने नेता को बिहार से बाहर नहीं जाने देंगे। इस तरह की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं यह दिखाती हैं कि मुख्यमंत्री के फैसले ने पार्टी के अंदर काफी हलचल पैदा कर दी है।
पार्टी नेतृत्व के सामने बढ़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद जेडीयू नेतृत्व के लिए एक चुनौती बन सकता है। पार्टी के लिए जरूरी है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को समझाए और स्थिति को नियंत्रित करे, ताकि संगठन के अंदर एकता बनी रहे। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता भी लगातार कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें शांत रहने की अपील कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में Nitish Kumar का प्रभाव काफी बड़ा है और उनके किसी भी फैसले का असर सीधे कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर पड़ता है। ऐसे में राज्यसभा को लेकर लिए गए इस फैसले पर पार्टी के अंदर चर्चा और बहस होना स्वाभाविक है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की कोशिश यही है कि विवाद को जल्द से जल्द शांत किया जाए और संगठन को एकजुट रखा जाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस नाराजगी को किस तरह संभालती है और क्या कार्यकर्ताओं की असहमति दूर हो पाती है या नहीं।








