13 अगस्त के बाद झारखंड में क्या होगा? निशिकांत दुबे ने छात्रों के आंदोलन के बीच दे दिया बड़ा अल्टीमेटम

Nishikant Dubey Hunger Strike: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। अब इस आंदोलन में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey)  के उतरने के ऐलान ने मामला और गर्म कर दिया है। दुबे ने राज्य सरकार को 13 अगस्त तक का समय देते हुए कहा है कि अगर छात्रों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो वह पार्टी से अनुमति लेकर आंदोलन में शामिल होंगे और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनके इस ऐलान के बाद सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

13 अगस्त तक सरकार को दिया समय

गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए झारखंड सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर 13 अगस्त तक छात्रों की समस्याओं को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया, तो वह अपनी पार्टी से अनुमति लेकर छात्रों के आंदोलन में शामिल होंगे और भूख हड़ताल करेंगे। दुबे ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक झारखंड के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि कई परीक्षाओं में पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं के कारण मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र?

झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी लंबे समय से बनी हुई है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो। आंदोलनकारी प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे भर्ती प्रक्रिया में ऐसे बदलाव चाहते हैं जिससे भविष्य में परीक्षा से जुड़ी शिकायतों और विवादों को कम किया जा सके। निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) के समर्थन के ऐलान से आंदोलन कर रहे छात्रों को राजनीतिक समर्थन भी मिला है।

सरकार के सामने बढ़ सकता है दबाव

निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) के ऐलान के बाद अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। अगर 13 अगस्त तक सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो दुबे के आंदोलन में शामिल होने से राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इस बीच छात्रों की ओर से सरकार के साथ बातचीत की दिशा में भी एक कदम आगे बढ़ाया गया है। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक प्रतिनिधिमंडल तैयार करने की बात कही है। यह प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ प्रस्तावित बातचीत में छात्रों का पक्ष रखेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में बातचीत और आंदोलन दोनों ही महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। दूसरी ओर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील की है, ताकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में अपनी बात रख सकें।

अब 13 अगस्त पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल झारखंड के छात्र इस उम्मीद में हैं कि सरकार उनकी शिकायतों पर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगी। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के साथ कथित गड़बड़ियों की जांच कराना है। वहीं निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने 13 अगस्त की समयसीमा तय कर सरकार के सामने अपनी स्थिति साफ कर दी है। अब देखना होगा कि इस तारीख से पहले सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है। अगर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो बीजेपी सांसद के भूख हड़ताल पर बैठने के ऐलान से JPSC विवाद और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल छात्रों की बातचीत और सरकार के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।

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