महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं। बुधवार को पुणे जिले के बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुबह करीब नौ बजे उनके पैतृक गांव काटेवाडी से शुरू हुई अंतिम यात्रा लगभग छह किलोमीटर का सफर तय करते हुए बारामती पहुंची। इस दौरान सड़क के दोनों ओर हजारों लोग खड़े होकर अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई देते नजर आए। जैसे-जैसे अंतिम यात्रा आगे बढ़ती गई, माहौल गमगीन होता चला गया। लोगों की आंखों में आंसू और जुबान पर सिर्फ एक ही नाम था—अजित पवार।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर, बेटे पार्थ ने दी मुखाग्नि
अजित पवार का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर विद्या प्रतिष्ठान मैदान लाया गया, जहां अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी की गईं। दोपहर करीब 12 बजकर 10 मिनट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। बेटे पार्थ पवार ने पिता को मुखाग्नि दी, यह दृश्य देखकर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। मैदान में सन्नाटा पसरा हुआ था, सिर्फ मंत्रोच्चार और लोगों की सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही थी। राजकीय सम्मान के तहत पुलिस की टुकड़ी ने सलामी दी, जिससे माहौल और भी भावुक हो गया। यह पल न सिर्फ पवार परिवार, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए बेहद पीड़ादायक था।
श्रद्धांजलि देने उमड़ा राजनीतिक दिग्गजों का सैलाब
बारामती में अजित पवार को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए देश और राज्य के कई बड़े नेता पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, मनसे प्रमुख राज ठाकरे और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत सहित कई वरिष्ठ नेता अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अमित शाह ने मौके पर पहुंचकर शरद पवार से मुलाकात की और परिवार को ढांढस बंधाया। VVIPs की मौजूदगी के बावजूद पूरा कार्यक्रम सादगी और शांति के साथ संपन्न हुआ। हर नेता के चेहरे पर शोक साफ नजर आ रहा था, जो यह दिखाता है कि अजित पवार का राजनीतिक कद कितना बड़ा था।
राजनीति से परे, जनता के नेता के रूप में याद किए जाएंगे अजित पवार
अजित पवार को सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रशासक और जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम फैसले लिए और महाराष्ट्र की राजनीति में अलग पहचान बनाई। बारामती से उनका गहरा जुड़ाव हमेशा चर्चा में रहा। अंतिम संस्कार के दौरान जिस तरह आम जनता उमड़ी, उसने साफ कर दिया कि अजित पवार जनता के दिलों में कितनी गहरी जगह बना चुके थे। उनके जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। आज बारामती ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य एक ऐसे नेता को याद कर रहा है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
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