ट्रंप की एक धमकी या कुछ और? सुबह-सुबह शेयर बाजार में क्यों मच गया ऐसा कोहराम कि निवेशक रह गए दंग!

Stock Market: सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। जैसे ही बाजार खुला, कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स में तेज गिरावट देखने को मिली और यह 1400 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं निफ्टी भी भारी दबाव में आकर तेजी से नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार में बिकवाली का ऐसा माहौल बन गया कि निवेशकों के बीच घबराहट फैल गई। बीएसई सेंसेक्स करीब 76 हजार के आसपास खुला और लगातार गिरावट के दबाव में रहा, जबकि निफ्टी 23,600 के करीब आकर कमजोर दिखाई दिया। प्री-ओपनिंग सेशन में भी संकेत साफ थे कि बाजार में आज बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है, लेकिन किसी ने इतनी तेज गिरावट की उम्मीद नहीं की थी। सुबह के शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों के करोड़ों रुपये के मार्केट वैल्यू को नुकसान हुआ और ट्रेडिंग फ्लोर पर पूरी तरह से बेचैनी का माहौल बन गया।

वैश्विक तनाव ने बढ़ाया डर

शेयर बाजार में आई इस अचानक गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। इसी बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और ईरानी बंदरगाहों को लेकर कड़े रुख की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया। निवेशकों को आशंका है कि अगर यह तनाव और बढ़ा तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। इसी अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए भारतीय बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सबसे पहले इक्विटी मार्केट से दूरी बना लेते हैं, और आज का क्रैश इसी पैटर्न को दर्शाता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आग

इस गिरावट को और तेज करने में कच्चे तेल की कीमतों का बड़ा योगदान रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड अचानक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी करीब 8 प्रतिशत की तेजी देखी गई। तेल की कीमतों में इस उछाल ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन देशों में जो तेल आयात पर निर्भर हैं, जैसे भारत। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव बनता है और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसी डर के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार में भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे गिरावट और तेज हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

आगे क्या होगा बाजार का हाल?

आज की तेज गिरावट के बाद निवेशकों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। छोटे निवेशकों से लेकर बड़े फंड हाउस तक सभी सतर्क हो गए हैं और कई जगहों पर प्रॉफिट बुकिंग और रिस्क कटिंग शुरू हो गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव में कमी नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी मान रहे हैं, लेकिन फिलहाल शॉर्ट टर्म में दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बिना घबराए सोच-समझकर ही निवेश के फैसले लें। आज की इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर कितनी तेजी से पड़ता है और जरा सी हलचल भी बाजार को हिला सकती है।

Read More-क्या रूस खत्म करेगा ईरान-अमेरिका तनाव? पुतिन की अचानक एंट्री से बदला खेल!

Hot this week

ग्रेटर नोएडा में बड़ा एक्सीडेंट, बच्चों से भरी बस भिड़ी, मचा हड़कंप

ग्रेटर नोएडा में सोमवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img