Fruits Vegetables Prices: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के बीच आम आदमी की थाली से फल और सब्जियां दूर होती नजर आ रही हैं। पिछले दो-तीन दिनों में मौसम के बदले मिजाज और बेमौसम बारिश ने मंडियों का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया है। दिल्ली-NCR के स्थानीय बाजारों में फलों की कीमतों में अचानक 20 फीसदी तक का उछाल देखा गया है। जो फल हफ्ते भर पहले आम आदमी की पहुंच में थे, वे अब ‘प्रीमियम’ कैटिगरी में शामिल हो गए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि थोक मंडी में कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव न होने के बावजूद, आपके घर के पास वाली रेहड़ी और दुकानों पर दाम आसमान छू रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अंगूर और अनार जैसी चीजें अब ₹200 से ₹250 प्रति किलो तक बिक रही हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
नवरात्रि की मांग और बारिश का डबल अटैक
राजधानी की स्थानीय मंडियों में इस समय फलों की कीमतों में लगी आग के पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला, चैत्र नवरात्रि के चलते फलों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि व्रत रखने वाले लोग बड़े पैमाने पर फलों का सेवन कर रहे हैं। दूसरा, पिछले बुधवार को हुई अचानक बारिश ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। आजादपुर मंडी, जो एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी है, वहां शुक्रवार को खरीदारों की संख्या कम रही, जिसके चलते थोक में तो माल थोड़ा सस्ता बिका, लेकिन खुदरा विक्रेताओं ने इसका फायदा आम जनता को नहीं दिया। स्थानीय बाजारों में केला जो ₹40-50 दर्जन मिलता था, वह अब ₹80 तक पहुँच गया है। वहीं संतरा ₹120 से ₹200 और सेब की कीमतों में भी भारी बढ़त देखी जा रही है।
थोक में सस्ता, खुदरा में महंगा
आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंडी में कीमतें बहुत ज्यादा नहीं बढ़ीं, तो गलियों में बिकने वाले फल इतने महंगे क्यों हैं? आजादपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि थोक में उन्होंने कम मार्जिन पर माल बेचा है, लेकिन स्थानीय दुकानदार ‘शॉर्टेज’ का डर दिखाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। अंगूर की पेटी थोक में सस्ती पड़ने के बावजूद खुदरा बाजार में इसे ₹250 किलो तक बेचा जा रहा है। पपीता, चीकू और अमरूद की मांग भी पीक पर है, जिसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। मौसम की अनिश्चितता और रविवार को मंडी बंद रहने की खबर ने खुदरा विक्रेताओं को कीमतें बढ़ाने का एक और बहाना दे दिया है, जिससे सीधा नुकसान ग्राहकों की जेब को हो रहा है।
क्या आलू-टमाटर भी देंगे झटका?
फलों के बाद अब सबकी नजरें सब्जियों की टोकरी पर टिकी हैं। स्थानीय बाजारों में हरी सब्जियां पहले ही 7 से 10 फीसदी तक महंगी हो चुकी हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि आलू और प्याज की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं। आजादपुर मंडी मर्चेंट एसोसिएशन के अनुसार, छिटपुट बारिश से आलू की फसल पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो हरी सब्जियों की आवक कम हो सकती है। रविवार को मंडी की छुट्टी होने के कारण शनिवार शाम से ही बाजारों में सब्जियों का स्टॉक कम होने की आशंका है। ऐसे में जिन इलाकों में मांग ज्यादा है, वहां गोभी, भिंडी और बीन्स जैसी सब्जियों के दाम शनिवार और सोमवार को और अधिक बढ़ सकते हैं।
क्या और बढ़ेगी महंगाई की मार?
भविष्य की बात करें तो आने वाले कुछ दिन ग्राहकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। सप्लाई चेन में बारिश की वजह से आया मामूली व्यवधान अगर लंबा खिंचा, तो सब्जियों की कीमतें भी फलों की तरह बेकाबू हो सकती हैं। व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल थोक स्तर पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगर लॉजिस्टिक्स (परिवहन) में दिक्कत आई, तो मंडियों तक माल कम पहुँचेगा। ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी ज़रूरत का सामान देख-परख कर खरीदें और हो सके तो थोक मंडियों से सीधे खरीदारी करें ताकि बिचौलियों के मुनाफे से बच सकें। फिलहाल, रसोई का बजट इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दो दिनों में मौसम का मिजाज कैसा रहता है और सप्लाई चेन कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।
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