हमले से पहले आसमान से हुई निगरानी! जेलेंस्की का दावा—रूस की एक ‘गुप्त मदद’ ने बदल दिया युद्ध का खेल?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रूस ने ईरान को अहम सैन्य जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके चलते ईरानी हमले बेहद सटीक साबित हुए। उनके मुताबिक, यह सिर्फ अंदाजा नहीं बल्कि खुफिया जानकारी पर आधारित दावा है। जेलेंस्की ने साफ शब्दों में कहा कि रूस और ईरान के बीच सहयोग “पूरी तरह” मौजूद है और यह सहयोग युद्ध के मैदान में असर डाल रहा है। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है कि क्या यह टकराव अब और बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।

सैटेलाइट तस्वीरों से जुड़ा दावा

जेलेंस्की के अनुसार, रूस ने Prince Sultan Air Base की सैटेलाइट तस्वीरें हमले से पहले कई बार ली थीं। यह एयरबेस Saudi Arabia में स्थित है और यहां अमेरिकी तथा सऊदी दोनों सेनाएं तैनात हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के हवाले से उन्होंने बताया कि 20, 23 और 25 मार्च को इस एयरबेस की तस्वीरें ली गईं, जिसके अगले ही दिन ईरान ने हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे वहां मौजूद सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा और कई सैनिक घायल हुए। जेलेंस्की का कहना है कि इस तरह की लगातार निगरानी किसी बड़े हमले की तैयारी का संकेत होती है।

हमले में हुआ नुकसान और सवाल

हमले के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्ट्स में घायलों की संख्या को लेकर थोड़ा अंतर है, लेकिन यह साफ है कि हमला असरदार रहा। इस घटना ने United States की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ, Iran ने इस हमले को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस द्वारा दी गई सैटेलाइट जानकारी का दावा सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

 बढ़ता वैश्विक तनाव और आगे की चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया के कई देशों को चिंता में डाल दिया है। एक ओर पहले से जारी Russia-Ukraine War है, वहीं अब मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव स्थिति को और जटिल बना सकता है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि उनके देश के पिछले अनुभव बताते हैं कि जब रूस बार-बार किसी क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरें लेता है, तो यह आमतौर पर किसी बड़े सैन्य कदम का संकेत होता है। हालांकि इस दावे के समर्थन में अभी तक ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आए हैं, जिससे इसे लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मामले पर वैश्विक शक्तियां क्या रुख अपनाती हैं और क्या यह विवाद किसी बड़े टकराव की दिशा में बढ़ता है।

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