अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दो हफ्ते के लिए घोषित सीजफायर के बाद बड़ा बयान दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान अब सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ने “सफल सत्ता परिवर्तन (Regime Change)” का दौर पार कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अब ईरान में यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) नहीं होगा और अमेरिका ईरान के साथ मिलकर भूमिगत परमाणु सामग्री को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने का काम करेगा।
आर्थिक राहत की संभावनाएं
ट्रंप ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि कुल 15 बिंदुओं में से कई पर दोनों पक्षों ने सहमति भी बना ली है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये समझौते टिकते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
शांति में सक्रिय भूमिका निभा रहा चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Mao Ning ने कहा कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि चीन लगातार संघर्ष-विराम और बातचीत को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है और पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने में “रचनात्मक भूमिका” निभा रहा है। ट्रंप ने भी चीन की भूमिका की सराहना की और कहा कि चीन ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में मदद की। इससे यह स्पष्ट होता है कि चीन खुद को क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में पेश करना चाहता है।
क्या रहेगा स्थायी समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया दावे और सीजफायर की घोषणा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अहम मानी जा रही है। करीब 40 दिनों तक अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव रहा, लेकिन अब सहयोग और समझौते की दिशा दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा कि यह सीजफायर और समझौते कितने स्थायी साबित होते हैं। अगर यह सफल होता है, तो होर्मुज की जल मार्ग से वैश्विक ऊर्जा संकट कम होगा और मिडिल ईस्ट में तनाव पर नियंत्रण मिलेगा।
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