US Iran War News: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है। मंगलवार, 3 नवंबर को ईरान के केशम द्वीप पर कई धमाकों की खबर सामने आई। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया है कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान के कुछ ठिकानों पर सीमित सैन्य हमले किए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी द्वीप पर विस्फोटों की जानकारी दी है। केशम द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है। यहां होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला, सामने आई ये बड़ी वजह
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर रक्षात्मक कार्रवाई की। बताया गया कि अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही ईरानी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से जुड़े ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया। हालांकि, अमेरिका ने इसे बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं बताया है। दूसरी तरफ, ईरान की सरकारी मीडिया ने धमाकों की पुष्टि तो की, लेकिन शुरुआत में इनके कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर क्या चल रही है रणनीति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जता चुके हैं। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए दबाव बनाने की खबरें सामने आई थीं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा हमले सीमित और रक्षात्मक प्रकृति के हैं। खास बात यह है कि अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। ऐसे समय में ईरान पर हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, ट्रंप ने हालिया बयान में चुनाव के बाद नए हमले की संभावना से इनकार किया है।
क्या फिर शुरू होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? पूरी दुनिया की नजरें इस पर
केशम द्वीप पर हमले की खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बड़े स्तर पर युद्ध शुरू हो सकता है? फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर उम्मीद जताई है। वहीं, क्षेत्र के कई देश नहीं चाहते कि तनाव इतना बढ़े कि पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में आ जाए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां सैन्य टकराव बढ़ने पर वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।







