तेल संकट से जूझता पाकिस्तान! विदेशी एयरलाइंस को अल्टीमेटम—टैंक फुल लाओ, वरना वापसी मुश्किल

वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों और सप्लाई में आई बाधाओं के बीच पाकिस्तान गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी (PAA) को विदेशी एयरलाइंस के लिए सख्त निर्देश जारी करने पड़े हैं। अब विदेशी फ्लाइट्स को पाकिस्तान आने से पहले ही अपने टैंकों में इतना ईंधन भरकर आना होगा कि वे वापसी भी उसी ईंधन से कर सकें।

यह फैसला उस समय लिया गया है जब देश में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की भारी कमी देखने को मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक अस्थायी लेकिन जरूरी कदम है, ताकि सीमित ईंधन भंडार को संभाला जा सके और घरेलू उड़ानों को प्राथमिकता दी जा सके।

 नोटिस टू एयरमैन (NOTAM) जारी, सप्लाई चेन में बड़ी बाधा

पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस संबंध में NOTAM (Notice to Airmen) जारी करते हुए सभी विदेशी एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पाकिस्तान में जेट A-1 फ्यूल पर निर्भरता कम करें। इस नोटिस में कहा गया है कि मौजूदा हालात में फ्यूल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, इसलिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह नोटिस 13 मार्च को जारी किया गया था और अब इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। हालांकि घरेलू एयरलाइंस को इस नियम से छूट दी गई है और उन्हें जरूरत के हिसाब से ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार अपने सीमित संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर उपयोग कर रही है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना कारण

इस पूरे संकट की जड़ मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति में आई रुकावट है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग के प्रभावित होने से दक्षिण एशिया के कई देशों पर असर पड़ा है। यही वजह है कि पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश को सबसे ज्यादा झटका लगा है।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर एविएशन फ्यूल पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ATF की कीमतें दोगुने से ज्यादा बढ़कर 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। यह पहली बार है जब यह कीमत 2 लाख रुपये के पार गई है, जो एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

 भारत समेत कई देशों पर असर, टिकट महंगे होने के संकेत

तेल की बढ़ती कीमतों का असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत समेत कई देशों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। भारत में भी ATF की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आने वाले समय में फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं।

अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है, तो एयरलाइन कंपनियों की लागत और बढ़ेगी, जिसका बोझ सीधे यात्रियों पर पड़ेगा। पाकिस्तान में उठाया गया यह कदम दिखाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक एविएशन सेक्टर पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

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