Saif al-Islam Gaddafi Killed: लीबिया के पूर्व तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह सनसनीखेज वारदात राजधानी त्रिपोली से करीब 136 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित जिंटान शहर में हुई। बताया जा रहा है कि यह हमला देर रात करीब 2:30 बजे हुआ, जब पूरा इलाका अंधेरे में डूबा था। हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। सबसे पहले घर में लगे सभी CCTV कैमरे बंद किए गए, ताकि कोई रिकॉर्ड न रहे। इसके बाद चार हथियारबंद लोग सीधे सैफ के घर के अंदर घुसे और बगीचे में मौजूद सैफ अल-इस्लाम पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद हमलावर बिना कोई सुराग छोड़े फरार हो गए। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस हत्या के पीछे कौन सा गुट या संगठन था, लेकिन घटना ने लीबिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गद्दाफी परिवार का करीबी बोला: यह सीधी हत्या थी
गद्दाफी परिवार से जुड़े एक करीबी सूत्र ने सऊदी अरब के सरकारी अखबार अल अरबिया को बताया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि पूरी तरह सोची-समझी हत्या थी। सूत्रों के मुताबिक, सैफ अल-इस्लाम को निशाना बनाकर मारा गया और हमलावरों का मकसद उन्हें जिंदा नहीं छोड़ना था। सैफ के एक करीबी सहयोगी ने भी इस घटना को “मर्डर” करार दिया है। वहीं, सैफ अल-इस्लाम के राजनीतिक सलाहकार रहे अब्दुल्ला ओथमान ने फेसबुक पोस्ट के जरिए उनकी मौत की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटते हैं। सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अब अल्लाह की हिफाज़त में हैं।” इस बयान के बाद पूरे लीबिया में हलचल मच गई। कई इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई है, क्योंकि गद्दाफी समर्थकों और विरोधी गुटों के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ था। इस हत्या को लीबिया की अंदरूनी राजनीति में एक बड़े मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन थे सैफ अल-इस्लाम: तानाशाह का बेटा या सुधार का चेहरा
सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, मुअम्मर गद्दाफी के दूसरे बेटे थे और लंबे समय तक उन्हें अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता रहा। एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें लीबिया का “सुधारवादी चेहरा” कहा जाता था। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते थे। सैफ पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते सुधारने और लीबिया को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीकार्य बनाने की कोशिश कर रहे थे। कई पश्चिमी सरकारें उन्हें लीबिया के भविष्य के नेता के रूप में देख रही थीं। लेकिन 2011 में जब मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह हुआ, तब सैफ अपने पिता के साथ खड़े नजर आए। इसके बाद उनकी छवि पूरी तरह बदल गई। जिस सैफ को कभी सुधारक माना जाता था, वही बाद में तानाशाही का प्रतीक बन गया। विद्रोह के बाद उनका राजनीतिक करियर बिखर गया और वह लंबे समय तक नजरबंद और गुमनामी की जिंदगी जीते रहे।
राजकुमार से बेनाम जिंदगी तक: पिता की मौत के बाद बदली किस्मत
कभी आलीशान जिंदगी जीने वाले सैफ अल-इस्लाम की हालत पिता मुअम्मर गद्दाफी की मौत के बाद पूरी तरह बदल गई थी। कहा जाता है कि जो शख्स कभी विदेशी मेहमानों की मेजबानी करता था और बाघ जैसे जानवर पालता था, वही बाद में नौकर से भी बदतर हालात में जीने को मजबूर हो गया। सत्ता, सुरक्षा और शोहरत सब कुछ छिन चुका था। वह जिंटान में बेहद सीमित दायरे में रह रहा था और सार्वजनिक जीवन से लगभग कट चुका था। हालांकि समय-समय पर उनके राजनीति में वापसी की अटकलें लगती रहीं। कई लोग मानते थे कि अगर सैफ सक्रिय राजनीति में लौटे तो लीबिया की सत्ता संतुलन बदल सकता है। शायद यही वजह थी कि उनकी हत्या को एक राजनीतिक साजिश के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर कौन थे और उनका मकसद क्या था, लेकिन सैफ अल-इस्लाम की मौत ने गद्दाफी परिवार की कहानी पर एक और खून से लिखा अध्याय जोड़ दिया है।
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