भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से अटका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार साकार हो गया है। करीब 18 वर्षों की बातचीत, कई दौर की असहमति और वैश्विक हालातों के उतार-चढ़ाव के बाद दोनों पक्ष इस ऐतिहासिक समझौते पर सहमत हो गए हैं। इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह भारत और यूरोपीय यूनियन के 27 देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक व्यापारिक समझौता माना जा रहा है। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा के साथ इस समझौते की घोषणा की। पीएम मोदी ने इसे भारत-EU संबंधों में एक निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच भरोसे, सहयोग और साझा भविष्य की नींव को और मजबूत करता है।
पीएम मोदी का एलान: ‘यह सिर्फ डील नहीं, साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट’
प्रेस मीट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते दिन भी ऐतिहासिक थे, जब पहली बार यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन भी उतना ही खास है, क्योंकि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं अपने रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ कागजी समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की ताकत बनेंगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभाने के लिए तैयार है और यह डील भारत को उस दिशा में तेज़ी से आगे ले जाएगी।
किसानों, MSME और सर्विस सेक्टर को मिलेगा सीधा फायदा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने FTA के फायदों को विस्तार से गिनाते हुए कहा कि इस समझौते से भारत के किसानों और छोटे उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक सीधी और आसान पहुंच मिलेगी। कृषि उत्पादों, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारतीय उत्पादों के लिए नए अवसर खुलेंगे। खासतौर पर MSME सेक्टर के लिए यह डील बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे छोटे उद्योगों को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत के सर्विस सेक्टर, खासकर आईटी, डिजिटल सर्विसेज, हेल्थकेयर और प्रोफेशनल सर्विसेज को यूरोपीय यूनियन में नई पहचान और विस्तार मिलेगा। उनके अनुसार, यह समझौता भारत के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलेगा और मैन्युफैक्चरिंग में इनोवेशन को बढ़ावा देगा। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी वैश्विक मंच मिलेगा।
इंडो-पैसिफिक से कैरेबियन तक बढ़ेगा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और यूरोपीय यूनियन के रणनीतिक सहयोग की भी बात की। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डालने वाली होगी। पीएम मोदी के अनुसार, भारत और EU मिलकर इंडो-पैसिफिक से लेकर कैरेबियन क्षेत्र तक ट्राइ-लेटरल प्रोजेक्ट्स का विस्तार करेंगे। इन परियोजनाओं का फोकस सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, क्लीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन से निपटने और महिला सशक्तिकरण पर होगा। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था और सतत विकास के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है। ऐसे में यह डील न केवल भारत और यूरोप के रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि वैश्विक व्यापार में स्थिरता और भरोसे का संदेश भी देगी।
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