अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका विनाशकारी सेना ईरान में नहीं भेजेगा, जो पहले रवाना होने वाली थी। ट्रंप ने पाकिस्तान को इस वार्ता का श्रेय दिया, लेकिन सवालों के बीच उन्होंने संकेत दिया कि चीन ने भी ईरान को बातचीत के लिए राजी करने में भूमिका निभाई।
ईरान ने भी बयान में कहा कि उसने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता स्वीकार कर ली है। दोनों पक्षों ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और विनाशकारी हमलों से बचने पर सहमति जताई। ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया और 10 अप्रैल को इस पर आगे चर्चा की पुष्टि की।
चीन की छिपी भूमिका
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या चीन ने सीजफायर में हस्तक्षेप किया, तो उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा सुना है।” मार्च के आखिरी सप्ताह में पाकिस्तान ने बातचीत की पहल की थी, जबकि चीन ने भी क्षेत्र में शांति के समर्थन में कई बयान जारी किए।
31 मार्च को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इसके एक दिन बाद पाकिस्तान-चीन ने संयुक्त रूप से पांच सूत्रीय पहल की घोषणा की, जिसमें तुरंत सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट खोलने की अपील शामिल थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, चीन ने अंतिम समय में हस्तक्षेप कर ईरान पर शांति की दिशा में लचीलापन दिखाने का दबाव डाला।
सीजफायर के बाद चीन की प्रतिक्रिया
सीजफायर के बाद चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। हालांकि वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने पहले कहा था कि बीजिंग शांति के लिए प्रयासरत है। प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “सभी पक्षों को ईमानदारी दिखानी चाहिए और युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहिए।”
दिलचस्प बात यह है कि सीजफायर से एक दिन पहले चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयासों की अपील की गई थी। इससे स्पष्ट है कि चीन ने क्षेत्रीय शांति में अपना रणनीतिक हाथ बढ़ाया और मध्यस्थों के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाए रखा।
ट्रंप की बीजिंग यात्रा और भविष्य की संभावनाएँ
ट्रंप अगले महीने यानी 14-15 मई को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग यात्रा करेंगे। ट्रंप ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बताया और कहा कि वे साल के अंत में शी और उनकी पत्नी को वॉशिंगटन डीसी में भी मेजबानी देंगे।
इस बैठक में ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और भविष्य के रणनीतिक कदमों पर चर्चा होगी। यह यात्रा इस क्षेत्र में स्थिरता लाने और चीन के मध्यस्थ भूमिका को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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