पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार तड़के डूरंड रेखा के पास दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प की खबर सामने आई। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, पक्तिका प्रांत के तेरवा इलाके में सुबह करीब 3 बजे फायरिंग शुरू हुई। अभी तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। अफगान मीडिया का दावा है कि अफगान बलों ने पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान के मीरानशाह और स्पिनवाम स्थित सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया। एक ठिकाने पर आग लगने की भी खबर है। अफगान पक्ष ने इस कार्रवाई को “रद अल-जुल्म” नाम दिया है और कहा है कि यह पाकिस्तान की ओर से पहले की गई बमबारी का जवाब है। दोनों देशों के बीच यह टकराव अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद और आपसी आरोपों का नतीजा बताया जा रहा है।
पाकिस्तान का बड़ा दावा और ‘खुली जंग’ की चेतावनी
पाकिस्तान ने दावा किया है कि हालिया कार्रवाई में तालिबान के 330 लड़ाके मारे गए हैं। साथ ही, पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि उसने अफगान सीमा से हुई फायरिंग के जवाब में प्रभावी कार्रवाई की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो ‘खुली जंग’ के लिए भी तैयार हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया में हवाई हमले किए थे। पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय का कहना है कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। दूसरी ओर, टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) ने भी हमलों की जिम्मेदारी लेने और जवाब देने की बात कही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। जानकारों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई बढ़ती है तो यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है और पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
डूरंड रेखा: विवाद की जड़
डूरंड रेखा वह सीमा है जो ब्रिटिश शासन के समय तय की गई थी और आज भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण बनी हुई है। अफगानिस्तान लंबे समय से इस सीमा को पूरी तरह स्वीकार नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। इसी वजह से सीमा पर अक्सर तनाव की स्थिति बनती रहती है। हाल के महीनों में सीमा पार से हमलों और आतंकवादी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं। पाकिस्तान का कहना है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हो रहा है, जबकि अफगान पक्ष इन आरोपों को खारिज करता है। अब ड्रोन हमलों और बमबारी के बाद मामला और गंभीर हो गया है। सीमा पर रहने वाले आम लोगों में डर का माहौल है और कई इलाकों में लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सऊदी अरब, कतर और तुर्की दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि हालात और न बिगड़ें। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब अफगानिस्तान की स्थिति पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका दखल दे सकता है। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों का जिक्र भी किया, जिसे कई लोग पाकिस्तान के समर्थन के संकेत के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द बातचीत शुरू नहीं हुई तो यह टकराव बड़े युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल दोनों देशों की सेनाएं अलर्ट पर हैं और सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास कामयाब होंगे या क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
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