पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में ऐसा बयान दिया है, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बार किसी मौजूदा रक्षा मंत्री ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में बलूचिस्तान में आतंकी और विद्रोही हमले तेजी से बढ़े हैं, जिनसे निपटना सेना के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है। ख्वाजा आसिफ ने यह भी माना कि सेना लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि हर इलाके में प्रभावी गश्त और नियंत्रण संभव नहीं हो पा रहा। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बलूचिस्तान में रेलवे ट्रैक उड़ाने, सुरक्षा चौकियों पर हमले और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रक्षा मंत्री का यह कबूलनामा पाकिस्तान के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है।
40 प्रतिशत इलाका, सीमित संसाधन और बढ़ती चुनौती
ख्वाजा आसिफ ने संसद में बताया कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा घेरता है। उन्होंने कहा कि इतने विशाल और दूर-दराज फैले इलाके की सुरक्षा करना किसी एक बड़े शहर की सुरक्षा से कहीं ज्यादा कठिन है। पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में फैले गांवों तक सेना की नियमित पहुंच एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। रक्षा मंत्री के मुताबिक सरकार ने मजबूरी में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए हैं, लेकिन इसके बावजूद हर जगह निगरानी रखना संभव नहीं हो पा रहा। उन्होंने यह भी माना कि लंबे समय तक लगातार तैनाती के कारण सैनिकों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। सीमित संसाधन, लंबी दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सेना की प्रभावशीलता को कमजोर कर रही हैं, जिसका फायदा विद्रोही संगठन उठा रहे हैं।
विद्रोहियों के पास महंगे और आधुनिक हथियार, बढ़ती चिंता
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का सबसे चौंकाने वाला खुलासा विद्रोहियों के हथियारों को लेकर रहा। उन्होंने संसद में बताया कि कई मामलों में बलूच विद्रोहियों के पास पाकिस्तानी सेना से भी ज्यादा आधुनिक और महंगे हथियार मौजूद हैं। उनके अनुसार विद्रोही करीब 20 लाख रुपये तक की राइफल, 4 से 5 हजार डॉलर के थर्मल और लेजर सिस्टम और लगभग 20 हजार डॉलर का पूरा लड़ाकू गियर इस्तेमाल कर रहे हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि विद्रोहियों तक इतना आधुनिक हथियार आखिर पहुंच कैसे रहा है। रक्षा मंत्री ने सीधे तौर पर किसी देश या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने माना कि यह स्थिति पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। बलूच विद्रोहियों की बढ़ती ताकत और तकनीकी क्षमता सेना के लिए नई और गंभीर चुनौती बन चुकी है।
राजनीतिक असर, सुरक्षा नीति पर सवाल और आने वाले खतरे
ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा नीति पर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार और सेना की रणनीति पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा, विकास की कमी और राजनीतिक असंतोष ने विद्रोह को और मजबूत किया है। अब जब खुद रक्षा मंत्री सेना की सीमाएं स्वीकार कर रहे हैं, तो यह साफ हो गया है कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो बलूचिस्तान में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर पूरे पाकिस्तान पर पड़ेगा। ख्वाजा आसिफ का यह कबूलनामा न सिर्फ मौजूदा हालात की तस्वीर पेश करता है, बल्कि आने वाले समय में पाकिस्तान के सामने खड़ी बड़ी सुरक्षा चुनौती की चेतावनी भी देता है।
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