पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहा सीमा विवाद अब एक भयावह मोड़ ले चुका है। पिछले 48 घंटों से जारी भीषण गोलाबारी के बीच पाकिस्तान की सेना (ISPR) ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि अफगानिस्तान की ओर से हुए हमले में उनके **12 जांबाज सैनिकों की मौत** हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में 27 अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है। यह झड़प डूरंड लाइन के पास उन इलाकों में हुई है, जिन्हें पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानता है। पाकिस्तान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अफगान सेना के हौसले पस्त होने के बजाय और भी बुलंद नजर आ रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों नागरिक अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं, क्योंकि दोनों तरफ से भारी तोपखाने का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अफगान आर्मी चीफ की ललकार
इस भारी सैन्य नुकसान के बाद जब पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहा था, तभी अफगानिस्तान के आर्मी चीफ फसीहुद्दीन फितरत ने एक ऐसा बयान जारी किया जिसने आग में घी डालने का काम किया है। तालिबानी सेना के प्रमुख फितरत ने बेहद तल्ख लहजे में पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हमारी सीमाओं की ओर एक उंगली भी उठी, तो उसका जवाब हम पूरी मुट्ठी से देंगे।” फितरत ने अपनी सेना को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान अब किसी भी विदेशी ताकत के दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वे अपनी आंतरिक समस्याओं का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ना बंद करें। अफगान आर्मी चीफ के इस ‘फिस्ट’ (मुट्ठी) वाले बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि तालिबान अब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रणनीति अपना रहा है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है।
डूरंड लाइन का वो विवाद: जिसने दो पड़ोसी मुल्कों को बना दिया जानी दुश्मन
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस कड़वाहट की सबसे बड़ी वजह ‘डूरंड लाइन’ है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है और वहां बाड़ लगाकर इसे सील करना चाहता है, जबकि अफगानिस्तान (तालिबान सरकार समेत) इस रेखा को कभी मान्यता नहीं देता। ताजा हिंसा तब भड़की जब पाकिस्तानी सेना ने विवादित क्षेत्र में नई चौकियां बनाने की कोशिश की। जवाबी हमले में अफगान बलों ने रॉकेट और मोर्टार का इस्तेमाल किया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी जनहानि उठानी पड़ी। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी जमीन पर हमले करने वाले आतंकी संगठनों को अफगानिस्तान पनाह दे रहा है, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सीमा पर तनाव पैदा कर रहा है। यह केवल जमीन का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि अब यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच मूंछ की लड़ाई (Ego War) बन चुका है।
महायुद्ध की आहट: क्या दक्षिण एशिया में फटने वाला है बारूद का ढेर?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। पाकिस्तान के भीतर 12 सैनिकों की शहादत को लेकर भारी गुस्सा है और वहां की जनता अपनी सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है। दूसरी ओर, तालिबान के लड़ाके अत्याधुनिक अमेरिकी हथियारों के साथ सीमा पर डटे हुए हैं, जो वे पिछले युद्ध के बाद छोड़ गए थे। आसमान में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट और जमीन पर अफगान टैंकों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि किसी भी पल एक छोटी सी चिंगारी पूरे क्षेत्र को राख कर सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की शांति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह विवाद बातचीत की मेज पर सुलझेगा या बंदूकों के शोर में।








