Friday, January 2, 2026

कब्र से उठा अगला तानाशाह! किम जोंग उन के बाद सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाली है बेटी जू ऐ?

नॉर्थ कोरिया जैसे बंद और रहस्यमयी देश में सत्ता परिवर्तन हमेशा से वैश्विक चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि यहां जनता वोट नहीं देती बल्कि सत्ता पीढ़ियों में सौंपी जाती है। अब एक बार फिर यही सवाल उठ रहा है कि किम जोंग उन के बाद नॉर्थ कोरिया की बागडोर किसके हाथों में जाएगी। हालिया घटनाक्रम ने इस सवाल का जवाब लगभग साफ कर दिया है। किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ऐ को लगातार सार्वजनिक मंचों पर अपने साथ ला रहे हैं और अब पहली बार उन्हें अपने दादा किम इल सुंग और पिता किम जोंग इल के समाधि स्थल पर ले जाया गया है। नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई तस्वीरों ने यह संकेत दे दिया है कि जू ऐ सिर्फ परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि भविष्य की सत्ता का चेहरा बनती जा रही हैं। जिस तरह से उन्हें राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक स्थलों से जोड़ा जा रहा है, वह इस बात की ओर इशारा करता है कि उत्तराधिकार की तैयारी अब खुलकर की जा रही है।

कब्र का प्रतीकात्मक संदेश

कुमसुसन पैलेस ऑफ द सन नॉर्थ कोरिया में सिर्फ एक मकबरा नहीं, बल्कि सत्ता और विचारधारा का सबसे पवित्र केंद्र माना जाता है। यहां किम इल सुंग और किम जोंग इल को “शाश्वत नेता” के रूप में संरक्षित किया गया है। किम जोंग उन जब अपनी बेटी जू ऐ को इस स्थान पर लेकर पहुंचे, तो यह दौरा सामान्य पारिवारिक यात्रा नहीं माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तानाशाही व्यवस्था में ऐसे प्रतीकात्मक कदम भविष्य की सत्ता का स्पष्ट संकेत होते हैं। तस्वीरों में जू ऐ का आत्मविश्वास, उनकी मौजूदगी और उन्हें मिलने वाला सम्मान यह बताता है कि उन्हें धीरे-धीरे जनता और पार्टी दोनों के सामने एक वैध उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया जा रहा है। नॉर्थ कोरिया में जहां हर दृश्य और हर तस्वीर का राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है, वहां इस दौरे को सत्ता हस्तांतरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

साउथ कोरिया की खुफिया चेतावनी: जू ऐ ही है अगली कतार में

सिर्फ नॉर्थ कोरिया के इशारे ही नहीं, बल्कि साउथ कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी भी पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि किम जू ऐ को अगली शासक के रूप में तैयार किया जा रहा है। एजेंसी के अनुसार, किम जोंग उन के साथ जू ऐ की हाई-प्रोफाइल विदेशी यात्राएं और सैन्य कार्यक्रमों में मौजूदगी इस बात का प्रमाण हैं कि उन्हें राजनीतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2022 में जब जू ऐ पहली बार दुनिया के सामने आईं, तब वह अपने पिता के साथ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण देखने पहुंची थीं। यह संदेश साफ था कि सैन्य शक्ति, जो नॉर्थ कोरिया की सत्ता की रीढ़ है, उससे उन्हें शुरू से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद सरकारी मीडिया में उनके लिए ऐसे विशेष शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो आमतौर पर केवल शीर्ष नेताओं के लिए आरक्षित रहते हैं। यह सब संकेत मिलकर यह बताने के लिए काफी हैं कि जू ऐ को सिर्फ परिवार की वारिस नहीं, बल्कि सत्ता की उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

पैकटू वंश और तानाशाही की विरासत: क्या इतिहास दोहराएगी जू ऐ?

नॉर्थ कोरिया की राजनीति पूरी तरह से “पैकटू वंश” के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक तरह के धार्मिक विश्वास की तरह पेश किया गया है। किम इल सुंग से शुरू हुई यह विरासत किम जोंग इल और फिर किम जोंग उन तक पहुंची। अब अगर जू ऐ सत्ता संभालती हैं, तो वह इस दुनिया की सबसे युवा और शायद पहली महिला तानाशाहों में से एक होंगी। हालांकि उनकी उम्र और अनुभव को लेकर सवाल उठेंगे, लेकिन नॉर्थ कोरिया की व्यवस्था में यह कोई बाधा नहीं मानी जाती। यहां सत्ता का मतलब लोकतांत्रिक सहमति नहीं, बल्कि विरासत और सैन्य नियंत्रण होता है। जिस तरह से जू ऐ को धीरे-धीरे सत्ता के हर अहम प्रतीक से जोड़ा जा रहा है, उससे यह साफ होता जा रहा है कि नॉर्थ कोरिया का भविष्य भी किम परिवार के हाथों में ही रहने वाला है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या जू ऐ अपने पिता और पूर्वजों की तरह सख्त शासन करेंगी, या यह विरासत किसी नए रूप में सामने आएगी।

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