सीजफायर के चंद घंटों बाद दहला ईरान: लावन आइलैंड की रिफाइनरी पर बड़ा हमला, खाक हुआ शांति समझौता?

दुनिया अभी अमेरिका और ईरान के बीच हुए सशर्त सीजफायर (संघर्ष विराम) की खबर पर राहत की सांस ले ही रही थी कि खाड़ी के देशों से आई एक खबर ने फिर से युद्ध के बादलों को गहरा कर दिया है। सीजफायर की औपचारिक घोषणा के महज कुछ ही घंटों के भीतर ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘लावन आइलैंड’ पर स्थित एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। बुधवार सुबह हुए इस हमले ने न केवल ईरान के सुरक्षा तंत्र को हिला दिया है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह शांति समझौता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है? न्यूज एजेंसी एपी और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, जब लोग युद्ध थमने की उम्मीद कर रहे थे, ठीक उसी वक्त रिफाइनरी से उठता काला धुआं शांति की कोशिशों को जलाकर राख कर रहा था।

लावन आइलैंड पर मची तबाही: क्या था मंजर?

स्थानीय समय के अनुसार बुधवार सुबह करीब 10 बजे लावन द्वीप पर स्थित रिफाइनरी अचानक धमाकों से गूंज उठी। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया कि हमला इतना अचानक था कि कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तुरंत ही फायर फाइटर्स की कई टीमों को मौके पर रवाना किया गया, जो घंटों तक आग पर काबू पाने की जद्दोजहद करती रहीं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी के हताहत होने या जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई है। लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस अभी भी बरकरार है—ईरानी अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है। सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद इस तरह का सटीक हमला किसी बड़ी साजिश या समझौते को तोड़ने की कोशिश की ओर इशारा करता है।

आखिर क्यों चुना गया यह निशाना?

हमलावरों ने लावन आइलैंड को चुनकर ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी ऊर्जा शक्ति पर सीधा प्रहार किया है। फारस की खाड़ी में स्थित यह 78 वर्ग किमी का द्वीप ईरान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। यह न केवल एक प्रमुख ऑयल रिफाइनरी का केंद्र है, बल्कि कच्चे तेल के निर्यात के लिए एक बड़ा टर्मिनल भी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह द्वीप ईरान के गैस भंडार और रिफाइंड तेल के लिए दुनिया भर में मशहूर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टर्मिनल को निशाना बनाकर हमलावर ने ईरान की सप्लाई चेन को बाधित करने और उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने का संदेश दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका है।

अमेरिका का ‘नाजुक समझौता’

पिछले 40 दिनों से चल रहे इस खूनी संघर्ष को थामने के लिए अमेरिका ने अगले दो हफ्तों तक एक-दूसरे पर हमला न करने का सशर्त समझौता किया था। लेकिन इस हमले के बाद समझौते की विश्वसनीयता खतरे में है। दिलचस्प बात यह है कि एक ओर ईरान में धमाके हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर हंगरी में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस सीजफायर को एक ‘बेहद नाजुक समझौता’ करार दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि तेहरान को अपनी हरकतों पर लगाम लगानी होगी। इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण वार्ता होनी है, जिससे पहले इस हमले ने माहौल को पूरी तरह तनावपूर्ण बना दिया है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान वार्ता से पहले ईरान इस हमले का क्या जवाब देता है।

क्या फिर शुरू होगा युद्ध?

रिफाइनरी पर हुआ यह हमला उस समय हुआ है जब दोनों पक्ष शांति की राह खोजने का दावा कर रहे थे। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे अभी भी हमले की प्रकृति और जिम्मेदारी तय करने के लिए सबूत जुटा रहे हैं। यदि इस हमले के तार किसी भी तरह से अमेरिका या उसके समर्थित समूहों से जुड़ते हैं, तो अगले दो हफ्तों का शांति समझौता चंद पलों में खत्म हो सकता है। यह हमला यह भी दिखाता है कि खाड़ी में शांति स्थापित करना कितना जटिल है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह हमला किसी ‘थर्ड पार्टी’ की कोशिश थी जो इस समझौते को नाकाम करना चाहती है, या फिर यह ईरान को पाकिस्तान वार्ता की मेज पर कमजोर करने की एक सोची-समझी चाल है?

Read more-US-Iran सीजफायर पर सियासी वार: संजय राउत बोले- ‘अब पाकिस्तान की बढ़ेगी हैसियत, भारत पर उठेंगे सवाल’

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img