ईरान ने पाकिस्तान में वार्ता से इनकार किया? अराघची ने तोड़ा चुप्पी, सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार (4 अप्रैल 2026) को स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी पाकिस्तान में मध्यस्थता वार्ता में शामिल होने से इनकार नहीं किया। अराघची ने कहा, “हमने पाकिस्तान की ओर से वार्ता के प्रयासों की सराहना की है और इस्लामाबाद आने से हम कभी मना नहीं करेंगे। हमारी चिंता तो युद्ध के स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान की शर्तों को लेकर है, जो हम पर थोपी गई हैं।”

अराघची ने इस बयान के जरिए अमेरिकी मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में ईरान के रुख को गलत तरीके से पेश किए जाने का खंडन किया। उनका कहना था कि जंग का एक स्पष्ट और निष्पक्ष समाधान होना चाहिए, तभी स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।

पाकिस्तानी मीडिया के दावे पर विराम

पाकिस्तानी मीडिया, विशेष रूप से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने 3 अप्रैल 2026 को दावा किया था कि अमेरिका वार्ता के लिए तैयार था लेकिन ईरान ने अचानक इस्लामाबाद आने से मना कर दिया। इसके बाद अमेरिकी मीडिया जैसे वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इसी रिपोर्ट को आगे बढ़ाया।

हालांकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन रिपोर्ट्स को खारिज किया और कहा कि इशाक डार के ब्रीफिंग में बताई गई जानकारी को गलत तरीके से पेश किया गया। अब्बास अराघची की स्पष्टीकरण पोस्ट के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ट्विटर पर जवाब देते हुए लिखा, “आपकी सफाई के लिए मैं वास्तव में आभारी हूं, मेरे प्रिय भाई।”

पाकिस्तान की मध्यस्थता पहल और चीन का समर्थन

अराघची का बयान ऐसे समय में आया जब पाकिस्तान ने 2 अप्रैल 2026 को कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के स्थायी समाधान के लिए मध्यस्थता करने का मौका देना सम्मान की बात होगी। पाकिस्तान और चीन की तरफ से प्रस्तावित पाँच सूत्रीय शांति पहल को दोनों देशों ने व्यापक रूप से स्वीकार किया।

इस पहल में युद्धविराम, शांति बहाल करना और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करना शामिल था। पाकिस्तान ने बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के समर्थन से यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में सार्थक प्रयास हो।

अमेरिका का सीजफायर प्रस्ताव ठुकराया, युद्ध जारी

हालांकि अमेरिका ने 48 घंटे के लिए सीजफायर का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन ईरान ने इसे औपचारिक रूप से ठुकरा दिया। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान सरकार अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और युद्ध जारी रहेगा।

इस बीच, मध्यस्थता वार्ता के लिए पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। अराघची ने साफ किया कि वे वार्ता से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन केवल निष्पक्ष और न्यायपूर्ण शर्तों पर ही चर्चा संभव है। इस बयान ने पाकिस्तान और ईरान के बीच रिश्तों को नए सिरे से स्पष्ट किया और अमेरिकी मीडिया की गलतफहमियों का पर्दाफाश किया।

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