मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान में किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। इन हमलों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इतना साफ है कि इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने इजरायल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कुवैत जैसे देशों की दिशा में भी मिसाइलें दागीं। कई जगहों पर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। हालात ऐसे बन गए हैं कि पूरा इलाका किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति की अपील कर रहा है, लेकिन जमीन पर सैन्य गतिविधियां कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं।
खामेनेई की मौत और ईरान में शोक
तनाव के बीच ईरान की सरकारी मीडिया ने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की पुष्टि की है। उनके निधन के बाद देश में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। खामेनेई पिछले कई दशकों से ईरान की राजनीति के केंद्र में थे और सेना, न्यायपालिका और विदेश नीति जैसे अहम फैसलों में उनकी निर्णायक भूमिका मानी जाती थी। उनकी मौत के तुरंत बाद ईरान ने दावा किया कि उसने 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इन हमलों से कितना नुकसान हुआ, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में अलर्ट बढ़ा दिया गया है। खामेनेई के निधन ने पहले से चल रहे सैन्य तनाव को और गंभीर बना दिया है।
UN में अमेरिका का बड़ा आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे और अपने समर्थित समूहों के जरिए निशाना बनाने की कोशिश की। अमेरिका का दावा है कि ईरान खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने में सक्रिय है। इस बयान के बाद UN में माहौल और गरम हो गया। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि ईरान की ओर से इन आरोपों को लेकर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आनी बाकी है। यह आरोप अगर सही साबित होते हैं, तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
‘सबसे भयानक हमले’ की चेतावनी और आगे का खतरा
खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ‘सबसे भयानक हमले’ की चेतावनी दी है। लेबनान से हिजबुल्लाह और यमन से हूती विद्रोहियों की गतिविधियां भी तेज बताई जा रही हैं। इससे संघर्ष कई मोर्चों पर फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात काबू में नहीं आए तो यह टकराव पूरे मिडिल ईस्ट को प्रभावित कर सकता है। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस बढ़ते संघर्ष को रोक पाएगी या आने वाले दिनों में क्षेत्र और ज्यादा अस्थिर होगा। स्थिति बेहद संवेदनशील है और हर नई जानकारी के साथ तस्वीर बदलती नजर आ रही है।
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