Thursday, February 19, 2026

पीएम बनते ही तारिक रहमान का बड़ा वार! भारतीय एयरलाइन पर लगाया एयर स्पेस बैन

तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही समय बाद बांग्लादेश सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने क्षेत्रीय विमानन जगत में हलचल मचा दी। नई सरकार ने भारतीय निजी एयरलाइन SpiceJet के लिए अपने एयर स्पेस के उपयोग पर रोक लगा दी। यह फैसला अचानक सामने आया और इसे नई सरकार की सख्त प्रशासनिक नीति के रूप में देखा जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यह कदम बकाया भुगतान को लेकर उठाया गया है। बांग्लादेश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित एयरलाइन पर लंबे समय से कुछ वित्तीय देनदारियां लंबित थीं, जिन्हें कई बार याद दिलाने के बावजूद साफ नहीं किया गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान की सरकार ने संकेत दिया है कि आर्थिक अनुशासन और नियमों के पालन में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी, चाहे मामला किसी भी देश की कंपनी से जुड़ा हो।

बकाया भुगतान बना विवाद की जड़

बताया जा रहा है कि मामला एयर नेविगेशन चार्ज और अन्य सेवा शुल्क से जुड़ा है, जो किसी भी विदेशी एयरलाइन को किसी देश के एयर स्पेस के उपयोग के बदले चुकाने होते हैं। सूत्रों के अनुसार स्पाइसजेट पर बांग्लादेशी प्राधिकरण का लाखों डॉलर का बकाया था। कई दौर की बातचीत के बाद भी जब भुगतान नहीं हुआ, तब जाकर यह कड़ा फैसला लिया गया। बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी भी एयरलाइन को विशेष छूट नहीं दी जा सकती। वहीं एयरलाइन की ओर से कहा गया है कि भुगतान से जुड़े मुद्दे तकनीकी और वित्तीय प्रक्रियाओं के कारण लंबित थे और कंपनी समाधान की दिशा में काम कर रही है। इस फैसले के बाद अब स्पाइसजेट की उन उड़ानों पर असर पड़ सकता है जो बांग्लादेशी एयर स्पेस से होकर गुजरती थीं। इससे उड़ान मार्ग लंबा होने, ईंधन खर्च बढ़ने और समय में देरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

यात्रियों और क्षेत्रीय संबंधों पर असर

एयर स्पेस बंद होने का सीधा असर विमानन संचालन पर पड़ता है। यदि कोई एयरलाइन किसी देश के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकती तो उसे वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है। इससे न केवल लागत बढ़ती है बल्कि यात्रियों को भी देरी का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक एयरलाइन तक सीमित है, लेकिन इसका व्यापक संदेश क्षेत्रीय विमानन कंपनियों के लिए है। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि यह मुद्दा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को किस हद तक प्रभावित करता है। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह मामला पूरी तरह से व्यावसायिक और प्रशासनिक है, न कि राजनीतिक। फिर भी प्रधानमंत्री बदलने के तुरंत बाद लिया गया यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

आगे क्या होगा, सबकी नजर समाधान पर

अब सवाल यह है कि क्या यह रोक लंबे समय तक जारी रहेगी या बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा। जानकारों का कहना है कि आमतौर पर ऐसे मामलों में बकाया भुगतान होने के बाद सेवाएं बहाल कर दी जाती हैं। यदि स्पाइसजेट जल्द ही बकाया राशि का निपटारा कर देती है तो बांग्लादेशी एयर स्पेस दोबारा खुल सकता है। नई सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सख्ती और वित्तीय पारदर्शिता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विमानन उद्योग पहले से ही वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में एयर स्पेस विवाद जैसी स्थितियां कंपनियों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती हैं। फिलहाल यात्रियों, एयरलाइन कंपनियों और दोनों देशों के नीति-निर्माताओं की नजर इस बात पर टिकी है कि बातचीत कितनी जल्दी सकारात्मक नतीजे तक पहुंचती है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह विवाद अस्थायी है या क्षेत्रीय विमानन समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाने वाला है।

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