अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि गाजा में हमास और दूसरे हथियारबंद गुटों के पूरी तरह से हथियार छोड़ने (निशस्त्रीकरण) को लेकर एक समझौता हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने किया है, जिसे युद्ध के बाद गाजा में शांति और दोबारा निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि इस कदम से गाजा में हिंसा रुकेगी और एक नए फिलिस्तीनी प्रशासन के बनने का रास्ता साफ होगा।
कैसे काम करेगा यह नया शांति समझौता?
ट्रंप ने बताया कि यह प्लान एक बार में नहीं बल्कि कई चरणों में लागू किया जाएगा। समझौते के तहत, जैसे-जैसे हालात सुधरेंगे, इजरायली सेना धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटेगी। गाजा में सुरक्षा संभालने के लिए एक ‘इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स’ (अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल) आएगी, जो नई फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी। ट्रंप का यह भी कहना है कि इससे इजरायल को पूरी सुरक्षा मिलेगी और गाजा की धरती का इस्तेमाल कभी भी आतंकी हमलों के लिए नहीं किया जा सकेगा।
इजरायल और हमास की तरफ से क्या है रिएक्शन?
इस समझौते को लेकर अभी भी कई तरह के संशय बने हुए हैं। एक इजरायली अधिकारी ने साफ कहा है कि ये शर्तें पूरी तरह से ठीक नहीं हैं, क्योंकि इजरायल चाहता है कि सबसे पहले हमास के सभी हथियार पूरी तरह खत्म किए जाएं। वहीं, दूसरी तरफ हमास की तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके करीबी एक सूत्र का कहना है कि यह देखा जाएगा कि इस पर इजरायल का क्या रुख रहता है और क्या इससे आगे कोई बात बन सकती है।
ज़मीन पर अब भी जारी है हमलों और हिंसा का दौर
एक तरफ जहां कूटनीतिक स्तर पर शांति समझौते की बातें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजा में हिंसा थमी नहीं है। हाल ही में फिलिस्तीनी डॉक्टरों ने बताया कि इजरायली हमलों में दो बच्चों समेत कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई है। कागजों पर हो रहे इन बड़े-बड़े समझौतों के बीच ज़मीन पर हालात अभी भी बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं, और आम लोग इस खूनी संघर्ष का शिकार हो रहे हैं।
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