बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला बिहार के वैशाली जिला से सामने आया है, जहां एक सरकारी स्कूल में रात के समय अश्लील डांस कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना हाजीपुर प्रखंड स्थित एक उत्क्रमित मध्य विद्यालय की है। जिस परिसर में दिन के वक्त बच्चे पढ़ाई करते हैं, वहीं रात होते ही बार बालाओं के डांस और तेज संगीत के बीच पार्टी का माहौल बन गया। वीडियो सामने आने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर शिक्षा के लिए बने स्थान का इस तरह इस्तेमाल कैसे किया गया।
शादी का जश्न या नियमों की अनदेखी?
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा कार्यक्रम स्कूल शिक्षा समिति के अध्यक्ष मलाई सिंह की बेटी की शादी के अवसर पर आयोजित किया गया था। बारातियों के मनोरंजन के लिए स्कूल परिसर को ही मंच बना दिया गया। आरोप है कि इस दौरान कथित तौर पर दर्जनभर बार बालाओं ने अश्लील गानों पर डांस किया, जिसे कई लोगों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई साधारण आयोजन नहीं था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ देर रात तक कार्यक्रम चलता रहा। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या निजी समारोह के लिए सरकारी स्कूल का उपयोग किया जा सकता है, और वह भी इस तरह के आयोजनों के लिए।
ताला टूटा, जिम्मेदारी किसकी?
इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्कूल के सहायक शिक्षक संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने स्कूल के मुख्य गेट का ताला तुड़वाकर परिसर में कार्यक्रम करवाया। हालांकि, शिक्षक और प्रबंधन से जुड़े अन्य लोग इस पर खुलकर बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कार्यक्रम के दौरान स्कूल के नाम को अखबार चिपकाकर ढक दिया गया, ताकि पहचान उजागर न हो सके। इससे यह अंदेशा और गहरा हो गया है कि आयोजन करने वालों को भी नियमों के उल्लंघन का अहसास था। बावजूद इसके, किसी ने प्रशासन को समय रहते सूचना नहीं दी।
शिकायत क्यों नहीं, कार्रवाई कब?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। न तो शिक्षा विभाग की ओर से और न ही स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई ठोस बयान सामने आया है। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर वीडियो वायरल न होता, तो क्या यह मामला दबा ही रह जाता? बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस स्कूल में बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहां इस तरह के आयोजन शिक्षा व्यवस्था की साख पर सीधा हमला हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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