ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। हादसे को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिस गड्ढे में पानी भरा होने की वजह से उनकी जान गई, वहां आज भी वही हालात बने हुए हैं। बेसमेंट के लिए खोदे गए इस गड्ढे से अब तक पानी नहीं निकाला जा सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन तुरंत कदम उठाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। गड्ढा अब भी पानी से भरा है और आने-जाने वालों के लिए खतरा बना हुआ है। यह स्थिति साफ दिखाती है कि सिस्टम कितनी धीमी गति से काम कर रहा है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ बैठकें
युवराज मेहता की मौत के बाद प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारी हरकत में जरूर आए, लेकिन उनकी कार्रवाई सिर्फ बैठकों तक ही सीमित रही। अधिकारी बार-बार यह चर्चा कर रहे हैं कि गड्ढे में भरा पानी आखिर कहां निकाला जाए। समस्या यह है कि यह पानी सिर्फ एक जगह नहीं फैला है, बल्कि आसपास की सोसायटियों और करीब आठ किलोमीटर तक ग्रीन बेल्ट में भी जमा है। अगर गड्ढे का पानी निकाल भी दिया गया, तो बिना स्थायी व्यवस्था के वह दोबारा भर जाएगा। इसी असमंजस की वजह से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका है।
सोसायटियों में निकासी व्यवस्था की कमी
जांच में यह बात सामने आई है कि गड्ढे में भरा ज्यादातर पानी आसपास बनी सोसायटियों से आ रहा है। इन सोसायटियों को बनाते समय बिल्डरों ने पानी निकासी की पक्की व्यवस्था नहीं की। उस वक्त फ्लैट खरीदने वालों ने भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि बारिश और इस्तेमाल का पानी बाहर निकलने की बजाय गड्ढों और खाली जगहों में भरता चला गया। युवराज मेहता की मौत के बाद यह लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर पहले ही सही इंतजाम होते, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
ग्रीन बेल्ट में पानी और सूखे पेड़
सेक्टर-150 की समस्या सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं है। पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने से ग्रीन बेल्ट में भी कई सालों से पानी भरा हुआ है। करीब आठ किलोमीटर के इलाके में जलभराव की वजह से हजारों पेड़ सूख चुके हैं। हरियाली के लिए बनाई गई ग्रीन बेल्ट अब बदहाली का शिकार हो रही है। पर्यावरण को भी इसका भारी नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द स्थायी जल निकासी योजना बनाए, ताकि भविष्य में न ऐसी घटनाएं हों और न ही इलाके की हरियाली खत्म हो। युवराज मेहता की मौत ने सिस्टम की कमजोरी दिखा दी है, अब देखना यह है कि जिम्मेदार कब जागते हैं।
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