Monday, January 26, 2026

अब बिजली चोरी जांच में हर कदम रिकॉर्ड होगा, यूपीपीसीएल ने बाडी वार्न कैमरे किए अनिवार्य

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली विभाग में जांच के नाम पर होने वाली मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। विभाग की विजिलेंस टीम को अब बाडी वार्न कैमरों से लैस किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सकेगा।
यूपीपीसीएल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जांच के दौरान टीम के हर सदस्य को कैमरे ऐसे कंधे पर लगाना होगा जिससे पूरी जांच प्रक्रिया स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो सके। रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी और विभागीय बड़े अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।

विजिलेंस टीम की संरचना और जिम्मेदारियां

बिजली चोरी के मामलों की जांच के लिए यूपीपीसीएल ने विशेष विजिलेंस टीम बनाई है। इस टीम में पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ अवर अभियंता स्तर के अधिकारी को नोडल नियुक्त किया गया है। यह टीम मास रेड और अन्य जांच कार्यों के दौरान सक्रिय रहेगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मास रेड के दौरान उप निरीक्षक और उपखंड अधिकारी या अवर अभियंता बाडी वार्न कैमरे का उपयोग करेंगे। यदि कैमरा काम नहीं करेगा तो जांच की कार्यवाही नहीं की जा सकेगी। इससे टीम पर किसी प्रकार का दबाव या मनमानी करने का सवाल ही नहीं उठेगा।

रिकॉर्डिंग की सुरक्षा और निगरानी

यूपीपीसीएल ने आदेश में यह भी तय किया है कि जांच के दौरान तैयार रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। बिजली चोरी मिलने पर उसकी पूरी विधिवत रिकार्डिंग की जाएगी और संयोजन विच्छेदन जैसी कार्यवाही भी कैमरे की निगरानी में ही की जाएगी।
यदि किसी कारणवश रिकॉर्डिंग को डिलीट करना जरूरी हो, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी को मुख्य अभियंता (वितरण क्षेत्र) की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, विद्युत ने कहा कि नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 पारदर्शिता बढ़ाने और विवाद से बचने की तैयारी

इस कदम से न सिर्फ विभागीय जांच में पारदर्शिता आएगी, बल्कि जनता में भी विभाग के प्रति विश्वास बढ़ेगा। लंबे समय से विजिलेंस टीम पर जांच के नाम पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। अब कैमरों की मदद से हर कार्रवाई की पूरी जानकारी रिकॉर्ड होगी, जिसे उच्च अधिकारी समय-समय पर देख सकेंगे।
यूपीपीसीएल की यह पहल बिजली चोरी से निपटने और विभागीय कार्यों में स्वच्छता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे बिजली चोरी के मामलों में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।

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