लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कुछ दिन पहले एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। सीएमएस स्कूल, लखनऊ में पढ़ने वाली छात्रा आराध्या मिश्रा की मुलाकात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हो गई। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात उस समय हुई जब आराध्या अपने परिवार के साथ होली की छुट्टियों में मैनपुरी जा रही थीं। एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा पर वे लोग नाश्ता कर रहे थे, तभी वहां अखिलेश यादव का काफिला पहुंचा। आराध्या ने अपने पिता से कहा कि उन्हें अखिलेश यादव से मिलना है, क्योंकि उन्होंने पिछले साल महाकुंभ 2025 के दौरान उन्हें एक पत्र लिखा था। इसके बाद आराध्या ने आगे बढ़कर अपना परिचय दिया और पत्र की याद दिलाई। अखिलेश यादव ने उनसे हाथ मिलाया और “बेस्ट ऑफ लक” कहकर आगे बढ़ गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।
“ओके-ओके नॉर्मल थी मुलाकात”, लेकिन क्यों जताई निराशा?
इस मुलाकात के बाद आराध्या मिश्रा ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में अपनी भावना साझा की। उन्होंने कहा कि उनकी मुलाकात “ओके-ओके नॉर्मल” रही, लेकिन वह उम्मीद कर रही थीं कि एक नेता के तौर पर अखिलेश यादव उनसे थोड़ी देर खड़े होकर बात करेंगे। आराध्या के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने अपना नाम बताया और पत्र लिखने की बात कही, अखिलेश यादव का व्यवहार अचानक शांत हो गया। वह सिर्फ “हूं-हूं” कह रहे थे। आराध्या ने कहा, “या तो उनका इगो था या एटीट्यूड, मुझे समझ नहीं आया।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति में ज्यादा रुचि नहीं रखतीं, लेकिन उन्हें लगा था कि एक जननेता बच्चों से थोड़ा आत्मीय व्यवहार करते हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कुछ लोग आराध्या की स्पष्टवादिता की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ इसे सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बता रहे हैं।
पत्र का इंतजार अब भी जारी, सीएम योगी से मिलने की इच्छा
दरअसल, आराध्या ने महाकुंभ 2025 के दौरान अखिलेश यादव को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि उन्हें महाकुंभ स्नान के लिए अपनी पत्नी और मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव को भी साथ ले जाना चाहिए था। वह कहती हैं कि अब तक उनके पत्र का कोई जवाब नहीं आया। यही कारण था कि जब उन्हें अखिलेश यादव सामने दिखे तो उन्होंने पत्र की याद दिलाई। आराध्या ने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलना चाहती हैं। जब उनसे पूछा गया कि अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ में कौन बेहतर नेता हैं, तो उन्होंने संतुलित जवाब देते हुए कहा कि जो देश और प्रदेश का विकास करेगा वही बेहतर नेता होगा। वहीं, मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राजनीति में उनकी खास रुचि नहीं है, लेकिन उन्हें डिंपल यादव “थोड़ी अच्छी” लगती हैं।
पिता ने बताया पूरा घटनाक्रम
आराध्या के पिता आशुतोष मिश्रा ने भी इस मुलाकात का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि जैसे ही आराध्या ने पत्र का जिक्र किया, उन्हें लगा कि अखिलेश यादव का चेहरा थोड़ा बदल गया। उनके अनुसार, आराध्या बहुत आत्मीयता से मिलने गई थीं और उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत थोड़ी देर चलेगी। हालांकि अखिलेश यादव ने हाथ मिलाया और शुभकामनाएं दीं, लेकिन बातचीत संक्षिप्त रही। आशुतोष मिश्रा ने कहा कि अखिलेश यादव की पहचान एक मिलनसार नेता के रूप में है, इसलिए उन्हें भी उम्मीद थी कि वह थोड़ी देर रुककर बच्ची से बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है पत्र की याद दिलाना उन्हें अच्छा न लगा हो। गौरतलब है कि पिछले साल आराध्या द्वारा लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था। फिलहाल इस मुलाकात के बाद उठे सवालों पर अखिलेश यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर नेताओं और आम नागरिकों, खासकर बच्चों के बीच संवाद और व्यवहार के मुद्दे को चर्चा में ले आई है।
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