इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज का दिन बहुत हलचल भरा रहा। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों को लेकर सुनवाई होनी थी। कोर्ट परिसर में लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए जज साहब ने फैसला किया कि सुनवाई खुले कोर्ट के बजाय उनके ‘चैंबर’ (निजी कमरे) में होगी। इस दौरान वहां केवल केस से जुड़े वकील ही मौजूद थे। मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि इसमें नाबालिग बच्चों के साथ गलत काम करने के आरोप लगाए गए हैं। सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि यह घटना कुंभ और माघ मेले के दौरान की है और इसे लेकर पुलिस के पास गंभीर शिकायतें आई हैं। इस गुप्त सुनवाई ने बाहर खड़े लोगों और भक्तों के बीच बेचैनी और सस्पेंस बढ़ा दिया।
जज का कड़ा सवाल: ‘पहले छोटी अदालत क्यों नहीं गए?’
सुनवाई के दौरान जज जे.के. सिन्हा ने शंकराचार्य के वकीलों से एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि नियम के मुताबिक आपको पहले ‘सेशंस कोर्ट’ (जिला या निचली अदालत) जाना चाहिए था, आप वहां क्यों नहीं गए? सीधे हाईकोर्ट आने की क्या जरूरत थी? कानून की भाषा में इसे ‘पोषणीयता’ का सवाल कहते हैं, जिसका मतलब है कि क्या यह केस सीधे हाईकोर्ट में सुनने लायक है या नहीं। जज के इस सवाल ने शंकराचार्य के पक्ष को थोड़ा कमजोर कर दिया, क्योंकि आमतौर पर हाईकोर्ट सीधे ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करता जब तक कि कोई बहुत बड़ी वजह न हो।
सरकारी वकीलों ने किया जोरदार विरोध: एफआईआर की बातें आईं सामने
सरकार की ओर से बड़े वकीलों की टीम ने शंकराचार्य को जमानत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को पढ़कर सुनाया। सरकारी पक्ष का कहना था कि बच्चों के साथ जो हुआ वह बहुत गंभीर मामला है, इसलिए आरोपी को कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अभी जमानत दे दी गई, तो जांच पर बुरा असर पड़ सकता है। पीड़ित पक्ष के वकीलों ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। चैंबर के अंदर काफी देर तक इस बात पर बहस हुई कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या शंकराचार्य को गिरफ्तार किया जाना चाहिए या नहीं।
अब आगे क्या? राहत मिलेगी या बढ़ेगी आफत?
आज की इस सुनवाई के बाद अब सबकी नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। चूंकि कल से होली की छुट्टियां शुरू हो रही हैं और कोर्ट कई दिनों के लिए बंद हो जाएगा, इसलिए आज का दिन बहुत कीमती है। अगर कोर्ट ने आज कोई राहत नहीं दी, तो 9 मार्च तक शंकराचार्य पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराता रहेगा। अब सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट इस केस को खुद सुनेगा या फिर उन्हें वापस निचली अदालत भेज देगा। अगर मामला निचली अदालत में गया, तो इसमें और समय लग सकता है। फिलहाल, आदेश का इंतजार किया जा रहा है जिससे यह साफ होगा कि शंकराचार्य की होली घर पर मनेगी या उन्हें कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
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