कानपुर किडनी कांड में बड़ा खुलासा—10 लाख में खरीदी किडनी, 60 लाख में बेची! फरार डॉक्टरों पर इनाम, देशभर में छापेमारी

कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट घोटाले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों को हिला कर रख दिया है। इस मामले में फरार चल रहे दो डॉक्टरों और एक ओटी मैनेजर पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। अब तक इस मामले में डॉक्टर दंपती समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि दर्जनभर से ज्यादा आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इन सभी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

कुर्की की तैयारी, दिल्ली-उत्तराखंड में छापेमारी

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का सरगना डॉ. रोहित, डॉ. अफजल अहमद और ओटी मैनेजर अली लंबे समय से फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए तीन अलग-अलग टीमें दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में लगातार छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी। जांच में सामने आया है कि डॉ. रोहित एनेस्थीसिया का काम संभालता था, जबकि अफजल मरीज और डोनर ढूंढने की जिम्मेदारी निभाता था। वहीं अली ऑपरेशन थिएटर में तकनीकी काम करता था और अवैध सर्जरी में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

देश-विदेश तक फैला था किडनी रैकेट

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक फैले हुए थे। पुलिस को शक है कि इस गैंग ने अब तक 40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब मेरठ में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने पुलिस से शिकायत की। छात्र ने आरोप लगाया कि उससे किडनी के बदले तय रकम से कम पैसे दिए गए, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची—मुनाफे का खेल

जांच में सामने आया है कि इस रैकेट में किडनी डोनर से करीब 10 लाख रुपये में अंग खरीदा जाता था, जबकि मरीज से इसके बदले 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। एक मामले में डोनर को साढ़े नौ लाख रुपये ही दिए गए, जबकि बाकी रकम गिरोह के सरगना और दलालों के बीच बांट ली गई। यानी एक ही ट्रांसप्लांट में करीब 50 लाख रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा था। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है और कई निजी अस्पतालों की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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