इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह हलाला और तीन तलाक से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी महिला के साथ बलात्कार, यौन शोषण या कोई दूसरा गंभीर अपराध होता है, तो उसे धार्मिक परंपरा या पर्सनल लॉ का मामला बताकर नहीं बचा जा सकता। अदालत ने नौ लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि जब किसी मामले में अपराध के साफ आरोप हों, तो पुलिस जांच को रोका नहीं जा सकता।
महिला ने लगाए हलाला के नाम पर शोषण के आरोप
यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का है। महिला का आरोप है कि जब वह नाबालिग थी, तब उसकी जबरन शादी कराई गई। कुछ समय बाद पति ने उसे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद दोबारा पति के साथ रहने के लिए उस पर हलाला करने का दबाव बनाया गया। महिला का कहना है कि इसी दौरान उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए गए। बाद में उसकी फिर से उसी व्यक्ति से शादी कराई गई। कुछ साल बाद पति ने दूसरी बार भी तीन तलाक दे दिया। इसके बाद फिर से हलाला के नाम पर उसके साथ गैंगरेप करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
कोर्ट बोला- कानून सबके लिए बराबर है
सुनवाई के दौरान आरोपियों ने कहा कि यह मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़ा है, इसलिए एफआईआर खत्म कर दी जाए। लेकिन हाईकोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि देश का आपराधिक कानून सबसे ऊपर है। अगर किसी महिला या नाबालिग के साथ अपराध हुआ है, तो धार्मिक परंपरा का सहारा लेकर कार्रवाई से नहीं बचा जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली बार हलाला के समय महिला नाबालिग थी, इसलिए पॉक्सो कानून भी इस मामले में लागू हो सकता है।
अब होगी पूरी जांच, आरोपियों को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने कहा कि इस समय यह तय नहीं किया जाएगा कि कौन दोषी है, लेकिन शिकायत में गंभीर आरोप हैं, इसलिए पुलिस को जांच करने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने सभी नौ आरोपियों की याचिका खारिज कर दी और पहले दिए गए अंतरिम आदेश भी वापस ले लिए। अब पुलिस पूरे मामले की विस्तार से जांच करेगी। कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और कानून के समान पालन के लिए अहम माना जा रहा है।
Read More-दोस्त ही निकला आस्तीन का सांप? केतन मर्डर केस में चेतन चौधरी के क्लासमेट पर पुलिस की सुई








