लखनऊ में एलपीजी सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश के बाद प्रशासनिक टीम लगातार गैस एजेंसियों पर छापेमारी कर रही है। इसी क्रम में एडीएम Jyoti Gautam ने चौक इलाके की एक गैस एजेंसी पर अचानक रेड मारी। रेड के दौरान एजेंसी के अंदर की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। बड़ी संख्या में उपभोक्ता कई दिनों से सिलेंडर न मिलने की शिकायत लेकर एजेंसी के बाहर भटक रहे थे। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से सीधे बात कर उनकी समस्याएं सुनीं और एजेंसी के रिकॉर्ड की भी जांच शुरू की।
सर्वर डाउन या कालाबाजारी का खेल?
छापेमारी के दौरान एक दिलचस्प स्थिति तब बनी जब एडीएम के सामने ही उपभोक्ताओं और एजेंसी संचालकों के बीच बहस शुरू हो गई। कई ग्राहकों का आरोप था कि वे पिछले कई दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जा रहा। उनका कहना था कि एजेंसी में सिलेंडर मौजूद हैं, फिर भी “सर्वर डाउन” का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है। वहीं एजेंसी संचालकों का दावा है कि अब गैस डिलिवरी पूरी तरह ओटीपी आधारित हो गई है, जिसके कारण सिस्टम पर अधिक दबाव है। सर्वर स्लो होने से डीएससी (DSC) नंबर जनरेट नहीं हो पा रहा, जिससे सिलेंडर की डिलिवरी में देरी हो रही है।
ओटीपी सिस्टम बना परेशानी की वजह
एजेंसी कर्मचारियों ने प्रशासन को बताया कि कई ग्राहकों के मोबाइल नंबर पुराने या गलत दर्ज हैं, जिसके कारण ओटीपी नहीं पहुंच पाता। ऐसे में सिस्टम डिलिवरी की अनुमति नहीं देता और प्रक्रिया रुक जाती है। इसके अलावा तकनीकी कारणों से भी कई बार सर्वर ठीक से काम नहीं करता। हालांकि मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह सब कालाबाजारी छिपाने का तरीका है। उनका आरोप है कि कई बार सिलेंडर खुले बाजार में ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि आम उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ता है।
कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
एडीएम ज्योति गौतम ने मौके पर स्पष्ट कहा कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि शहर के कई इलाकों में गैस एजेंसियों की जांच की जा चुकी है और जहां भी अवैध स्टॉकिंग या कालाबाजारी की पुष्टि हुई है, वहां तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई है। उन्होंने एजेंसी संचालकों को चेतावनी दी कि कोई भी एजेंसी सिलेंडर को रोककर नहीं रख सकती, क्योंकि पूरी डिलिवरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन मॉनिटर की जा रही है। प्रशासन ने यह भी कहा कि अगर उपभोक्ताओं को सिलेंडर न मिलने या कालाबाजारी की शिकायत है तो वे सीधे जिला प्रशासन को जानकारी दें, जिस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।








