15 साल तक भागता रहा दरिंदा… आखिर ऐसा क्या हुआ कि कानून के शिकंजे में फंसा और मिली उम्रकैद?

तेलंगाना की राजधानी Hyderabad से एक लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलने की खबर सामने आई है। साल 2010 में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला Kushaiguda के साईनगर इलाके का है, जिसने उस समय पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया कि भले ही न्याय में देरी हो जाए, लेकिन कानून अपराधियों को सजा देने में पीछे नहीं हटता। पीड़ित परिवार के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है, हालांकि बीते वर्षों का दर्द अब भी उनके साथ जुड़ा हुआ है।

2010 में हुई थी वारदात, पूरे इलाके में फैली थी सनसनी

यह मामला करीब 15 साल पुराना है, जब साईनगर में एक मासूम बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस जघन्य अपराध के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी की पहचान Kakarla Anil Kumar के रूप में हुई, लेकिन वारदात के बाद वह फरार हो गया था। पुलिस की कई कोशिशों के बावजूद वह लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया, जिससे यह मामला अधर में लटका रहा और पीड़ित परिवार न्याय के इंतजार में रहा।

वर्षों तक फरार रहा आरोपी, फिर ऐसे आया पकड़ में

मामले की गंभीरता को देखते हुए साल 2012 में आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद वह कानून से बचता रहा। करीब एक दशक से ज्यादा समय तक वह अलग-अलग जगहों पर छिपकर रह रहा था। आखिरकार नवंबर 2025 में पुलिस को बड़ी सफलता मिली, जब आरोपी को Vijayawada से गिरफ्तार किया गया। कुशाईगुड़ा थाने की टीम ने लगातार निगरानी और सूचना के आधार पर उसे दबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को हैदराबाद लाया गया और मामले की सुनवाई फिर से तेज की गई। इस गिरफ्तारी ने लंबे समय से रुके न्याय के रास्ते को फिर से खोल दिया।

कोर्ट का फैसला और परिवार की प्रतिक्रिया

मामले की सुनवाई Neredmet Fast Track Court में हुई, जहां सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया। यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए एक भावनात्मक क्षण रहा, क्योंकि उन्होंने वर्षों तक न्याय का इंतजार किया। हालांकि, परिवार का कहना है कि इस फैसले से उन्हें कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी बेटी की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यह मामला समाज के लिए भी एक संदेश है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं है।

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