पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जुड़ा एक संवेदनशील मामला इन दिनों भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत की नागरिक सरबजीत कौर, जो सिख धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से पाकिस्तान गई थीं, वहां निकाह करने और तय समय से अधिक रुकने के कारण हिरासत में ले ली गई हैं। पाकिस्तान सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि सरबजीत कौर को भारत वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सरबजीत कौर नवंबर महीने में सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे के साथ धार्मिक वीज़ा पर पाकिस्तान पहुंची थीं। उनका वीज़ा सीमित अवधि के लिए था, लेकिन तय समय पूरा होने के बाद भी वे पाकिस्तान में ही रहीं। इस दौरान उन्होंने शेख़ूपुरा जिले के रहने वाले नासिर हुसैन से निकाह कर लिया। यहीं से यह मामला केवल निजी रिश्ते तक सीमित न रहकर कानूनी और प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया।
जांच में क्या सामने आया, कैसे हुई हिरासत
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, चार जनवरी को ननकाना साहिब के एक गांव में सरबजीत कौर और नासिर हुसैन की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद खुफिया एजेंसियों ने तुरंत कदम उठाया। दोनों को हिरासत में लेकर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि सरबजीत कौर और नासिर हुसैन की जान-पहचान कई साल पुरानी थी। बताया गया कि दोनों की पहली बातचीत सोशल मीडिया के जरिए हुई थी और समय-समय पर मिलने के लिए वीज़ा के प्रयास भी किए गए थे, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण पहले अनुमति नहीं मिल सकी।
अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक वीज़ा का उद्देश्य केवल तीर्थयात्रा होता है, न कि विवाह या स्थायी निवास। इसी बिंदु को आधार बनाकर सरबजीत कौर के खिलाफ वीज़ा उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया। नासिर हुसैन के मोबाइल फोन को भी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किसी अन्य कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
निर्वासन की प्रक्रिया और कानूनी दखल
पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरबजीत कौर को निर्वासित कर भारत भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने की जिम्मेदारी इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) को सौंपी गई है, जो धार्मिक स्थलों और तीर्थयात्रियों से जुड़े मामलों का प्रबंधन करता है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के एक पूर्व मानवाधिकार अधिकारी ने सरबजीत कौर की भारत वापसी को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि सरबजीत कौर को जल्द से जल्द उनके देश भेजा जाए। हालांकि, याचिकाकर्ता ने यह भी माना कि धार्मिक वीज़ा का गलत इस्तेमाल सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
इससे पहले, लाहौर हाईकोर्ट ने एक मामले में पुलिस को सरबजीत कौर को परेशान न करने का आदेश दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि जब तक कानून का उल्लंघन साबित न हो, तब तक निजी जीवन में दखल नहीं दिया जाना चाहिए। अब नई परिस्थितियों में सरकार का रुख सख्त नजर आ रहा है और वीज़ा नियमों को सर्वोपरि बताया जा रहा है।
भारत वापसी तय, पति पर सस्पेंस बरकरार
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता सरबजीत कौर को सुरक्षित भारत वापस भेजने की है। उनके पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन के मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जाएगी। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया है क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं, अंतरराष्ट्रीय यात्रा नियम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता—तीनों जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दोनों देशों के बीच तीर्थयात्रा व्यवस्था को और सख्त बना सकती है। भविष्य में धार्मिक वीज़ा पर जाने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ाई जा सकती है, ताकि इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
सरबजीत कौर की कहानी अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने है—क्या यह महज एक निजी प्रेम कहानी थी या फिर वीज़ा नियमों की अनदेखी से पैदा हुआ अंतरराष्ट्रीय विवाद? आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।








