संसद में फिर खुलेगा महिला आरक्षण का रास्ता? 10 दिन बाद भी नहीं हुआ सत्रावसान, बढ़ा सियासी सस्पेंस

संसद का मानसून सत्र खत्म हुए करीब 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इन बिलों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसी बीच बीजेपी नेताओं के बयानों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

महिला आरक्षण पर बीजेपी ने विपक्ष से मांगा समर्थन

महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों से समर्थन की अपील की है। बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं से कहा कि अगर वे महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले प्रस्ताव का समर्थन भी करें। यह बयान राहुल गांधी के पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं की स्थिति और समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाने के बाद आया। इससे माना जा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। महिला आरक्षण कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन इसका लागू होना परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से जुड़ा है।

सत्रावसान में देरी से विपक्ष के सवाल, क्या है सरकार की तैयारी?

मानसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन सत्रावसान की औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार से सवाल पूछा है। उनका कहना है कि आमतौर पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगन और सत्रावसान के बीच ज्यादा लंबा अंतर नहीं होता। उन्होंने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मौकों पर यह अंतर कई दिनों तक रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति में देरी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष को आशंका है कि सरकार इसी अवधि का इस्तेमाल संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू करने या विशेष सत्र बुलाने की तैयारी के लिए कर सकती है।

परिसीमन बिल को लेकर भी बढ़ी हलचल

महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज है। परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या में बदलाव से है। महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया अहम मानी जाती है। ऐसे में चर्चा है कि सरकार आने वाले दिनों में दोनों मुद्दों से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। कुछ विपक्षी नेताओं ने भी इस संभावना को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार कब और किस तरीके से इन बिलों को संसद में लाएगी। ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी में हो रही देरी और सरकार की ओर से महिला आरक्षण पर दिए जा रहे लगातार बयानों के बीच अब सबकी नजर अगले कदम पर है।

Read More-26 घंटे से लापता 15 साल का मिथुन, खुले नाले में गिरने के बाद अब तक नहीं मिला सुराग; मां की आंखों में इंतजार

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img