MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के फैसले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने अपने पहले घोषित उम्मीदवार कमलेश यादव की जगह बीजेपी के बागी नेता डॉ. संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। कमलेश यादव नामांकन की तैयारी कर चुके थे, लेकिन आखिरी समय में टिकट बदलने से पूरा चुनावी समीकरण चर्चा में आ गया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर अखिलेश यादव ने अपना उम्मीदवार बदलकर यह दांव क्यों चला?
आखिरी समय में बदला फैसला, कमलेश यादव को लखनऊ बुलाया गया
समाजवादी पार्टी ने पहले गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से कमलेश यादव को उम्मीदवार घोषित किया था। वह नामांकन पत्र भी खरीद चुके थे और नामांकन दाखिल करने की तैयारी में थे। इसी बीच शुक्रवार देर शाम उन्हें जानकारी मिली कि फिलहाल नामांकन रोक दिया जाए। इसके बाद उन्हें लखनऊ बुलाया गया। पार्टी ने उनकी जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। अचानक हुए इस बदलाव ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, उम्मीदवार बदलने के पीछे पार्टी की ओर से बताए गए आधिकारिक कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
कौन हैं कमलेश यादव? करीब 10 साल से कर रहे शिक्षण कार्य
कमलेश यादव पेशे से शिक्षक हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह गोरखपुर के सहजनवा स्थित भोलाराम मुस्कुरा इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। वह गोरखपुर के खजरी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं और फिलहाल बिछिया मोहल्ले में रहते हैं। कमलेश यादव करीब एक दशक से शिक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। संगठन के स्तर पर भी उनकी सक्रियता रही है। वह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के वित्तविहीन गुट के प्रदेश सचिव हैं और समाजवादी शिक्षक सभा से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा, वह समाजवादी पार्टी के लिए भी लगातार काम करते आए हैं। उनके परिवार के सदस्य भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं।
टिकट कटने पर कमलेश ने क्या कहा? पार्टी के फैसले के साथ खड़े दिखे
टिकट कटने के बाद कमलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के बजाय पार्टी के फैसले का पालन करने की बात कही। उन्होंने खुद को समाजवादी पार्टी का छोटा सिपाही बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव जो आदेश देंगे, वह उसका पालन करेंगे। कमलेश के मुताबिक, उनका लक्ष्य पीडीए की मजबूत सरकार बनाने में योगदान देना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस उद्देश्य के लिए उन्हें छोटी-सी कुर्बानी देनी पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उनके इस बयान को पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, टिकट कटने के फैसले पर उनकी निजी प्रतिक्रिया के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
2027 से पहले अखिलेश यादव का सियासी संदेश क्या है?
डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाने के फैसले को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद संजयन त्रिपाठी ने बगावती रुख अपनाया और अब वह समाजवादी पार्टी के साथ आ गए हैं। ऐसे में सपा के इस कदम को बीजेपी से नाराज नेताओं को अपने पाले में लाने और ब्राह्मण मतदाताओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, इसका चुनावी असर क्या होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल, कमलेश यादव की जगह संजयन त्रिपाठी को उतारने के फैसले ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है।







