उत्तराखंड के हल्द्वानी से सामने आया एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी, जो कभी फेसबुक और यूट्यूब पर अपने डांस वीडियो के लिए जानी जाती थीं, आज गंभीर आरोपों के चलते जेल में हैं। बुधवार को हल्द्वानी के मुखानी थाने में घंटों चली पूछताछ के बाद देर रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उन्होंने हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे बयान दिए, जिनसे न केवल सामाजिक बल्कि धार्मिक भावनाएं भी आहत हुईं। पुलिस ने उन्हें रात करीब 11 बजे रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता कानून से ऊपर हो सकती है?
विरोध प्रदर्शन बना गिरफ्तारी की वजह
पुलिस के अनुसार, यह पूरा विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। इस प्रदर्शन में ज्योति अधिकारी की मौजूदगी और उनके बयानों ने माहौल को और अधिक उग्र बना दिया। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच पर हाथ में दरांती लहराई, जो कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, उन्होंने कुमाऊं और पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और स्थानीय लोक देवताओं की मान्यताओं व परंपराओं पर भी सवाल उठाए। इन टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद स्थानीय लोगों और कई सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते यह मामला धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराओं तक पहुंच गया।
विवादों से रहा पुराना नाता
ज्योति अधिकारी ने साल 2021 के आसपास फेसबुक और यूट्यूब पर कंटेंट बनाना शुरू किया था। शुरुआत में वह मुख्य रूप से डांस और रील्स के जरिए पहचान बना रही थीं, जिससे उन्हें एक खास वर्ग में लोकप्रियता भी मिली। धीरे-धीरे उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बोलना शुरू किया, जिससे उनका कंटेंट ज्यादा चर्चा में रहने लगा। हालांकि, इसी के साथ विवाद भी उनके नाम से जुड़ने लगे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बयानों पर आपत्ति जताई गई हो, लेकिन इस बार मामला इसलिए गंभीर हो गया क्योंकि बयान सार्वजनिक मंच से दिए गए और उसमें हथियार का प्रदर्शन भी शामिल था। पूछताछ के दौरान थाने के बाहर उनके समर्थक भी जमा हो गए थे, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
कानून व्यवस्था बनाम अभिव्यक्ति की सीमा, जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कानून व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक स्थान पर हथियार लहराना और समुदाय, महिलाओं या धार्मिक आस्थाओं के खिलाफ उत्तेजक टिप्पणी करना गंभीर अपराध है। फिलहाल ज्योति अधिकारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो किस संदर्भ में बनाए गए और क्या उनके पीछे किसी तरह की सुनियोजित मंशा थी। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी और उनकी सीमाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिली लोकप्रियता अगर नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो उसका अंजाम कितना गंभीर हो सकता है?
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